May 5, 2026
देश दुनिया

West Bengal ‘तीन पत्तियां’ मुरझाई, ‘कमल’ की बहार आई…

केरल से वाम का सफाया और तमिलनाडु में द्रमुक के हाथ से काफी दूर चली गई कुर्सी

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में जो नतीजे आए हैं उन्होंने एक साथ कई संदेश दिए हैं और इसमें सबसे बड़्ी हार ममता बनर्जी की हुई है। ममता की पार्टी बुरी तरह भाजपा से पिटी और भाजपा ने बहुमत से कहीं ज्यादा संख्या हासिल करते हुए दो तिहाई बहुमत की तरफ मार्च शुरु कर दिया। उधर ममता बनर्जी अपनी ही सीट से चुनाव हार गईं और उन्हें सुवेंदु अधिकारी ने पंद्रह हजार वोटों से हरा दिया। असम में हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व को लोगों ने इतना पसंद किया कि एक बार फिर उन्हें पिछली संख्या से ज्यादा सीट देकर शतक पूरा करा दिया। पुद्दुचेरी में भी भाजपा के लिए अच्छी खबर रही। उधर केरल से लेफ्ट का सफाया होते ही अब लेफ्ट के पास देश भर में किसी भी राज्य में सत्ता नहीं बची है, यहां कांग्रेस नीत यूडीएफ ने शतक लगाते हुए अपने ही इंडी गठबंधन वाले लेफ्ट पार्टियों को पीटा। एक्जिट पोल के अनुमानों से टीक विपरीत नतीजे तमिलनाड़ से भी आए जहां अभिनेता जोसेफ विजय की पहली बार चुनाव में उतरी पार्टी टीवीके ने शतक पार कर डीएमके से सत्ता छीन ली और एआईएमडीएमके के पास भी नहीं जाने दी। पश्चिम बंगाल की जीत भाजपा के लिए बहुत बड़ी है क्योंकि यह पहला मौका है जब भाजपा इस राज्य में न सिर्फ सत्ता तक पहुंची है बल्कि दो सौ से ज्यादा सीटों के साथ पहुंची है। वहीं ममता बनर्जी ने चुनावों में धांधली का आरोप लगाते हुए कहा है कि सो से ज्यादा सीटों पर वोट चोरी की गई है और उनकी इस बात को मस्कट में आराम कर रहे राहुल गांधी ने भी समर्थन दिया है। इन चुनावों में खास बात यह भी रही कि भाजपा उन सीटों पर भी जीत दर्ज करने में सफल रही जहां मुस्लिम वोट का प्रतिशत निर्णायक था। जब पश्चिम बंगाल में नब्बे प्रतिशत से भी कहीं ज्यादा की वोटिंग हुई तो एक्जिट पोल करने वालों के लिए यह समझ पाना मुश्किल हो रहा था कि आखिर ये वोटिंग किस दिशा में जा रही है लेकिन बाजार से भगवा गुलाल पूरी तरह गायब हो जाने से यह अनुमान लगाना आसान हो गया था कि भाजपा अपनी जीत को लेकर कितनी आश्वस्त है हालांकि इतनी सीटों की उम्मीद उसे भी नहीं थी। आज के चुनावी नतीजों में असम और पुद्दुचेरी ही ऐसे राज्य थे जहां पर अनुमान सटीक बैठे वरना न तमिलनाडु में किसी ने विजय की ऐसी जीत की उम्मीद की थी और न पश्चिम बंगाल से ममता के ऐसे सफाए की भविष्यवाणी ही हुई थीं। यहां तक कि केरल में भी यूडीएफ और पीडीएफ के बीच कांटे का मुकाबला बताया जा रहा था जबकि वहां से वाम का सफाया ही हो गया है।