Meenakshi का नामांकन रद्द, मध्यप्रदेश की राजनीति में उबाल
राज्यसभा की जिस सीट के लिए कांग्रेस के पास पर्याप्त विधायक संख्या भी है वह सीट भी हाथ से छिनी
मध्यप्रदेश की तीन राज्यसभा सीट में से एक सीट कांग्रेस के लिए तय थी क्योंकि उनके पास पर्याप्त से ज्यादा विधायक उपलब्ध थे लेकिन अब हालत ये हैं कि तीनों सीटें भाजपा के खाते में जा रही हैं क्योंकि कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का पर्चा ही खारिज हो गया है। कांग्रेस राज्यसभा की इस सीट के लिए सारे गुटों को एकजुट करने और विधायकों के बेंगलुरु के रिजॉर्ट में रखकर यह तय करना चाहती थी कि क्रॉस वोटिंग न हो सके। उधर विधायक बेंगलुरु की फ्लाइट पकड़ने पहुंचे और इधर पता चला कि अब विधायकों की इस चुनाव के लिए कोई जरुरत ही नहीं बची है क्योंकि अपने खिलाफ चल रहे मुकदमों की जानकारी देने में मीनाक्षी से जो चूक हुई उसके चलते उनका नामांकन रद्द हो गया है। राज्यसभा की यह सीट हाथ से जाते देख कांग्रेस प्रदेश से लेकर दिल्ली तक सक्रिय हो गई है और चुनाव आयोग से लेकर अदालती देहरी तक के सारे विकल्पों पर मंथन चल रहे हैं लेकिन इस मामले में मीनाक्षी की तरफ से हुई चूक को कानून के जानकार बड़ी गलती मान रहे हैं जिसको लेकर यह साफ है कि ऐसे तथ्य छपुाना नामांकन रद्द करने के लिए पर्याप्त आधार है। कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन खारिज होने पर कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भाजपा लोकतंत्र और संविधान को कमजोर करने के काम कर रही है। मीनाक्षी नटराजन, जीतू पटवारी, केसी वेणुगोपाल, कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और सचिन पायलट ने इस फैसले को राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताते हुए कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने तो प्रेस कांफ्रेंस में भाजपा को लोकतंत्र और संविधान पर हमला करने वाला बताते हुए चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप लगाए। उधर भाजपा की तरफ से मैदान संभाल रहे मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने नटराजन के नामांकन को निरस्त किए जाने की प्रक्रिया को न्याय की जीत बताने के साथ ही यह भी दावा किया कि नामांकन की त्रुटियों की जानकारी कांग्रेस के ही लोगों ने दी थी। नटराजन को लेकर अब मध्य प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने विधानसभा से लेकर चुनाव आयोग तक मामले को जोरदार तरीके से उठाया और अब अदालत में इसे ले जाने की तैयारी की बात भी कही गई है।
