Madhya Pradesh से तीनों भाजपा उम्मीदवार राज्यसभा पहुंचे, मतदान की भी जरुरत नहीं पड़ी
मीनाक्षी नटराजन का पर्चा खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट से भी कांग्रेस को तुरंत राहत नहीं मिली
मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवार बिना मतदान हुए ही जीत गए। नाम वापसी की समय-सीमा तीन बजे खत्म हुई और इन तीनों के ही नामांकन बचे थे इसलिए तीनों उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए। कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने पर तीनों भाजपाई उम्मीदवार तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट ही बचे थे। कांग्रेस प्रत्याशी नटराजन के आपराधिक मामले को छुपाने की बात पर नामांकन खारिज होने का मामला कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट भी ले गई लेकिन वहां सुनवाई एक दिन के लिए टल जाने पर वहां से भी कांग्रेस को राहत नहीं मिली। मध्य प्रदेश की रिक्त तीन सीटों में से आंकड़े तो यही बता रहे थे कि भाजपा के दो और कांग्रेस से एक प्रत्याशी को आसानी से जीतना चाहिए था लेकिन भाजपा ने तीसरे उम्मीदवार बतौर महेश केवट को खड़ा कर कांग्रेस को सीधी चुनौती दे दी थी और यही वजह है कि कांग्रेस अपने विधायकों को टूट से बचाने के लिए बेंगलुरु भेज रही थी लेकिन इस बीच मीनाक्षी के पर्चे के खारिज हो जाने की खबर ही सामने आ गई और विधायकों का दस दिनी बेंगलुरु टूर धरा का धरा रह गया। तरुण चुघ को भाजपा ने पंजाब की राजनीति के हिसाब से उतारा था जबकि रजनीश अग्रवाल पर बूथों के डिजटिटाइजेशन जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने के चलते भरोसा किया गया और महेश केवट को उत्तरप्रदेश में आने वाले चुनावों के मद्देनजर उतारा गया था।
