September 11, 2026
देश दुनिया

Assam में तीन तलाक के नए फैसले पर बहस बढ़ी

तीन तलाक कानून के बाद भी तीन तलाक को मंजूरी क्योंकि पति ने एक बार में नहीं बल्कि तीन बार में कहा ‘तलाक, तलाक, तलाक’

अदालतों में एक ही कानून का किस तरह अलग अलग विश्लेषण किया जाता है इसका एक उदाहरण फिर गुवाहाटी हाइकोर्ट के एक फैसले से नजर आ रहा है। इरअसल यहां एक ऐसा मामला पहुंचा जहां पति ने तीन बार ‘तलाक’ तो कहा लेकिन इनके बीच काफी अंतर रखा। उसने पहली बार तलाक शब्द मार्च में कहा दूसरी बार अप्रैल में और तीसरी बार मई में तलाक बोलकर कहा कि यह तलाक मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत ‘तलाक-ए-हसन’ है। अदालत ने कह दिया कि ‘तलाक-ए-हसन’ भारत में प्रतिबंधित नहीं है इसलिए इसे मान्य कर लिया जाए। हालांकि हाइकोर्ट ने यह जरुर जोड़ दिया कि अब ऐसे किसी मामले को असम के नए कानून के तहत रजिस्टर करना होगा। कोर्ट को यह तय करना था कि इसका रजिस्ट्रेशन हो तो किस कानून के तहत किया जाए। याचिकाकर्ता ने कहा कि धार्मिक कानून के मुताबिक उसने प्रक्रिया निभाई है इसलिए इसे रजिस्टर करें वहीं राज्य सरकार का पक्ष था कि कि जिस कानून में रजिस्ट्रेशन होता था वह 1935 का पुराना कानून खत्म हो चुका है। अदालत ने याचिकाकर्ता को मैरिज एंड डिवोर्स रजिस्ट्रार से संपर्क करे जो तय करेगा कि 2024 के कानून की धारा 12 के तहत इसे रजिस्टर करें या नहीं। अदालत ने इस केस के लिए कोर्ट नहीं आई पत्नी को लेकर कहा कि यदि वो चाहे तो तलाक को चुनौती दे सकती है। दरअसल एक ही बार में यदि तीन तलाक कहा जाए तो वह ‘तलाक-ए-बिद्दत’ है और यदि अलग अलग समय में तीन बार यही शब्द कहा जाए तो उसे ‘तलाक-ए-हसन’कहा जाता है यानी तीन तलाक कानून से बचने के लिए भी अब नए रास्ते खुलने लगे हैं।