June 12, 2026
देश दुनिया

Gymkhana Club के घपले और मनमानियां अब आ रही हैं सामने

क्लब को सरकार द्वारा जमीन मांगने पर आपत्ति है लेकिन सच यह है कि एक नहीं कई गड़बड़ियों में शामिल रहा है जिमखाना

जिमखाना क्लब को खाली किए जाने के नोटिस पर कुछ लोगों को बहुत आपत्ति थी कि आखिर इस अंग्रेजों के जमाने वाले क्लब को खाली क्यों कराया जा रहा है। प्रधानमंत्री के घर के पास स्थित 27 एकड़ से ज्यादा की जीमन पर फैले इस क्लब की मुफ्तखोरी चलते रहने देने के लिए न जाने कितने तर्क दिए गए लेकिन अब पता चल रहा है कि यह क्लब तो घोटालों की भी खदान है। इसके अलावा यहां से उड़ाए गए ड्रोन को प्रधानमंत्री निवास की सुरक्षा में दखल माने जाने का भी मामला सामने आया है। क्लब ने जगह खाली करने के आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है तो पता चल रहा है कि वकीलों और कोर्ट केसों में जमकर खर्च करने में भी क्लब ने खूब धांधली की है। क्लब सदस्यों में से ही कुछ ने क्लब के वकील बनकर करोड़ों की मुकदमेबाजी वाली फीस वसूली। क्लब ने पांच साल में मुकदमेबाजी पर 8 करोड़ से भी कहीं ज्यादा रकम खर्च की है। एक और चौंकाने वाले मामले का खुलासा यह भी हुआ है कि मृत सदस्य के नाम पर भी पार्टियां होती रहीं और खाने पीने के बिल उसके नाम से कटते रहे। ऐसे मृत व्यक्तियों के कार्ड के 31 मामले तो सामने आ ही चुके हैं। 36 करोड़ रुपए के ठेके दिए जाने को लेकर भी क्लब की तरफ से कोई सीधा जवाब अब तक सामने नहीं आया है। क्लब के ऑडिटर ने दो साल पहले कई आपत्तियां दर्ज कराते हुए इस्तीफा दे दिया और बताया था कि क्लब में बजट प्रक्रिया का अभाव है, इंटरनल ऑडिट जैसी कोई व्यवस्था का नहीं है। ऑडिटर का कहना है कि सॉफ्टवेयर और मैनुअल रिकॉर्ड इसलिए मेल नहीं खाता क्योंकि इसमें गड़बड़ियां की जाती हैं। ऑडिटर ने यह भी बताया था कि जरुरी दस्तावेजों तक क्लब की तरफ से पहुंचने ही नहीं दिया जाता है। इसके बाद नियुक्त ऑडिटर ने भी यही सब बातें दोहराते हुए क्लब पर आरोप लगाए थे। अगस्त 2022 में क्लब परिसर से प्रधानमंत्री आवास क्षेत्र में ड्रोन उड़ाने जाने की बात की भी जांच हुई जिसका अंतिम निष्कर्ष आज तक सामने नहीं आया है।