Rajyasabha Election मध्यप्रदेश में नटराजन का पर्चा खारिज , क्या भाजपा जीत गई?
कांग्रेस को भी गलती तो माननी होगी कि उन्होंने न सही पर्चा दाखिल किया न डमी उम्मीदवार का ही पर्चा लगाया
राज्यसभा चुनाव में मध्य प्रदेश से कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का पर्चा खारिज होना भोपाल से दिल्ली तक राजनीतिक बहस का मुद्दा होने के साथ कानूनी पेंच में भी उलझा नजर आ रहा है। केस की जानकारी छुपाने के अलावा भी कुछ गलतियां फॉर्म में पाई गई हैं लेकिन मुख्य वजह केस वाली ही है। कांग्रेस का कहना है कि उन्हें सिर्फ नोटिस मिला है इसलिए नामांकन रद्द करना गलत है। शिकायतकर्ता ने अन्य के साथ नटराजन पर आरोप लगाया था कि उन पर केस वापस लेने का दबाव बनाने वालों में शामिल थीं। भाजपा का कहना है कि तथ्यों को छुपाकर दाखिल किया गया नामांकन निरस्त किया जाना कहां से गलत है। इसमें यदि चुनाव आयोग की गाइडलाइंस देखें तो पता चलता है कि उम्मीदवारों को जानकारी देते हुए लंबित आपराधिक मामलों और सजा आदि का पूरा विवरण रिटर्निंग ऑफिसर को देना जरुरी है। जिन मामलों में सिर्फ एफआईआर हो उनका फार्म-26 (5) में पूरा विवरण देना जरुरी है। प्रत्याशी ने गलत जानकारी दी या छुपाई तो नतीजों के बाद हाईकोर्ट में चुनाव याचिका लगाई जा सकती है। गलत या अधूरी जानकारी पर कोर्ट की अवमानना का मामला भी चलाया जा सकता है। किसी भी तरह की गलत जानकारी या चूक पर नटराजन के खिलाफ मुकदमा हो सकता है। गलत या अधूरी जानकारी पर चुनाव याचिका दायर की जा सकती है लेकिन ऐसे मामले में नामांकन को खारिज करने के लिए रिटर्निंग ऑफिसर को पूर्ण अधिकार नहीं है। इसलिए नटराजन को अदालत से राहत मिल सकती है।
