TED Talk का दूसरा दिन, MCU में पत्रकारिता और आर्ट ऑफ स्टोरी टेलिंग पर संवाद
भारतीय संस्कृति और ज्ञानपरंपरा बहुत समृद्ध: प्रो. दिवाकर शुक्ला
पत्रकार सीटीसी के बजाए क्यूरोसिटी से करें काम: मनीष दीक्षित
एमसीयू में तीन दिवसीय टेड टॉक्स के दूसरे दिन टेलिमेडिसिन से लेकर पत्रिारिता तक और स्टेारी टेलिंग से लेकर संस्कृति व ज्ञान परंपरा तक पर बातें हुईं। विशेषज्ञ डॉ. प्रिया भावे चित्तावर ने सर्जरी विदाउट बॉर्डर विषय पर दिए, अपने उद्बोधन में कई दिलचस्प जानकारी साझा की। कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी के माध्यम से अब चिकित्सा जगत कई चमत्कार कर रहा है। अब छोटे से गांवों और कस्बों में भी अच्छे चिकित्सकों की सेवाएं उपलब्ध हैं। दूर-दराज के इलाकों से लोगों को बीमारियों के इलाज के लिए, हजारों किलोमीटर दूर जाने की जरूरत नहीं है। शहर में बैठे-बैठे रोबोटिक सर्जन अपनी गांवों तक विशेषज्ञता का लाभ दे रहे हैं। यह सब संभव हो पा रहा है टेलिकम्युनिकेशन की तकनीक से ।उन्होंनेविश्व की पहली टेलीसर्जरी से लेकर अब भारत में चिकित्सा जगत में हो रहे आधुनिकतम बदलाव की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हम कितने ही आगे बढ़ जाएं लेकिन एक डॉक्टर के अनुभव,विवेक और सर्जरी के समय निर्णय लेने की क्षमता का स्थान टेक्नोलॉजी नहीं ले सकती फिरभी जो कुछ रोबोटिक काम भारत में हो रहा है वह अचरज के साथ गर्व का भी विषय है। उन्होंनेउदाहरण दिया कि अगर दूरस्थ सीमा पर हमारा कोई सैनिक घायल हो जा, जहाँ तुरंत और तत्काल डॉक्टर नहीं पहुँच सकता है तो ड्रोन कैमरा के माध्यम से सर्जरी संभव है। डॉ. प्रिया ने श्रोताओं में शामिल छात्रों की जिज्ञासा भी शांत की। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अब डॉक्टर भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से जुड़कर मरीज को सरल शब्दों में ट्रीटमेंट और टरमिनोलॉजी आदि की जानकारीदे रहे हैं लेकिन मरीज की भी जिम्मेदारी है कि वह चिकित्सा शब्दावली को जानने का प्रयास करें क्योंकि एआई के माध्यम से अब सब कुछ जानना आसान हो गया है।इस कार्यक्रम के दूसरे सत्र में प्रोफेसर दिवाकर शुक्ला ने इंडियन आर्टआफ स्टोरी टेलिंग विषय पर अपनी बातरखते हुए कहा कि किसी भी कहानी को कहने के लिए बहुत से ज्ञान की आवश्यकता नहीं होती। भारत में स्टोरी टेलिंग के हजारों तरीके हैं। हम भारतीय कहानियों को अपने जीवन में जीते हैं। ये कहानियां कभी खत्म नहीं होती। यहां के लोग, उनकी संस्कृति और कला में हजारों कहानियां मिलती है। भारतीय घरों में रोज बनाए जाने वाली रंगोली या अल्पना में भी कहानियां होती हैं। उन्होंनेकहा कि भारतीय कहानियांबहुत प्रासंगिक होती हैं। भारत की कलाओं केजो पैटर्न हमें मिलते हैं उनकी अपनी एक विशिष्ट ऐतिहासिक श्रृंखला होती है। वर्ली आर्ट का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि गौर से देखने पर मालूम होताहै कि उसमें मानवीय जीवन की गतिविधियां और प्रकृति की नैसर्गिकता दिखती है। उसमें दिखने वाली परंपराएं और प्रतीक लोककलाकारों और महिलाओं द्वारा बनाए जाते हैं। उन्होंने कहा भारतीय कला का एक अपना विशिष्ट सौंदर्य है। हमें कहा जाता है कि हम अक्सर अपने गांव में जाएं उन्हें समझ वहां की संस्कृति को देखें तो उससे हमें बहुत सी चीज समझ आती हैं। इस सब को अनुभव करते हुए हम आसानी से कहानी कहना सीख सकते हैं। चीजों के घटते रहने को देखना हमें कई चीजें सिखाताहै। आज के संदर्भ में ही देखे तोयुवाओं को किसी औपचारिक लेक्चर के बजाय मेंटरिंग पसंद आती है। वे इसमें बेहतर महसूस करते हैं। रामायणऔर महाभारत की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इन कथाओं के भीतर अनेकों कहानियां होती है और हर कहानी बिल्कुल अलग होती हैै। यही कारण है कि रामायण और महाभारत के कई प्रकार भारत ही नहीं दुनियाभर में मौजूद है। उन्होंने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा बेहद विराट और समृद्ध है। यह हमारी चेतना में स्थापित है। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार उपवास और उनसे संबंधित कथाओं के श्रोता भी उसके पात्र बन जाते हैं यह भारत की कहानी कहने की कला का ही प्रभावहै। उन्होंने जनजातीय संस्कृतियों को विशिष्ट बताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति बेहद शक्तिशाली है। अगर हम इसे समझें और जानें तो इससे जुड़ी कहानियों को भी जान सकते हैं। आज कमर्शियल मीडिया भारत की लोक कथाओंसे प्रेरित होकर कहानियों को कह रहा है। स्टोरी टेलिंग की आर्ट के बारे में उन्होंने कहा कि ध्यान रखेंकि अगर हमारी कहानी कृत्रिम होगी तो उन्हें सुनने और समझने वालों को आनंद नहीं आएगा। एक अन्य सत्र में वरिष्ठ पत्रकार मनीष दीक्षित ने सच की तलाश में एक रिपोर्टर की जिम्मेदारी विषय पर अपनी बात रखते हुए कहाकि किसी भी पत्रकार तक कोई खबर पत्रकार तक चलकर नहीं आती है। खबर के लिए बहुत प्रयत्न करने होते हैं। याद रखें कि अगर कोई खबर अगर आप तक खुद चलकर आती है तो भी उसे जांचे और उसके तथ्यों को गहराई से वेरीफाई करें। पत्रकारिता में सूत्रों का खासा महत्व है। इसलिए एक पत्रकार को अपने सोर्स का ख्याल रखना चाहिए उनकादिल जीतना चाहिए। सोर्स कोई भी छोटा या बड़ा नहीं होता। सोर्स लगातार डेवलप करते रहनाचाहिए। उन्होंनेकहा कि पत्रकार का काम और उसकी खबरें ही उसे आगे बढ़ाती हैं। पत्रकारिता करते हुए निश्चित तौर पर चुनौतियांभी आती हैं। कई बार कानूनी चुनौतियां भी मिलती हैं। इसलिए खबरें करते समय संबंधित तथ्यों से जुड़े दस्तावेजअपने पास रखना चाहिए। इस अवसर पर विश्वविद्यालय में टेड टाकके आयोजन पर कुलगुरू श्री विजय मनोहर तिवारी ने विभाग को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि एक इंटरनेशनल प्लेटफार्म के साथ जुड़कर इस तरह का नवाचार अनुकरणीय है। कार्यक्रम में कुलसचिव पी. शशिकला ने स्वागत उद्बोधन दिया। कार्यक्रम में सत्रों का संचालन डॉ जया सुरजानी ने किया। इस अवसर पर विभागों के प्रमुख, सहित प्राध्यापक भी उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम का संयोजन एवं अतिथियों का आभार विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग के प्रमुख डा.पवित्र श्रीवास्तव ने किया।
