May 26, 2026
वर्ल्ड

Sharif की बेइज्जती कर रहे ट्रंप लेकिन पाकिस्तान को कोई फर्क नहीं पड़ा

ट्रंप ने राष्ट्र प्रमुखों से बात की तो बजाए शरीफ के मुनीर को कॉल किया जबकि प्रधानमंत्री से बात की जानी चाहिए थी

बेइज्जती की पाकिस्तान को इस कदर आदत पड़ चुकी है कि वह अब इसे महसूस भी नहीं करना चाहता। कल ही ट्रंप ने आठ मुस्लिम देशों से कहा कि उन्हें इजराइल से अच्छे संबंध बनाते हुए अब्राहम अकॉर्ड पर सहमत होना ही चाहिए। इसमें पेंच वाली बात यह थी कि ट्रंप ने जिन जिन देशों के प्रमुखों से बात होने का जिक्र किया उसमें पाकिस्तान भी शामिल था लेकिन ट्रंप ने इसमें प्रधानमंत्री शरीफ का नाम न लेते हुए सेनाध्यकक्ष आसिम मुनीर का नाम लिया। यानी एक ऐसे फैसले में जिसमें राष्ट्र प्रमुखों से बात की जा रही थी, ट्रंप ने बजाए शाहबाज शरीफ के आसिम मुनीर को फोन लगाना बेहतर समझा क्योंकि वो मानते हें असली सत्ता तो मुनीर के ही पास है। दूसरा कोई भी देश होता तो इतने में सवाल जवाब शुरु हो जाते बल्कि हो सकता था सेना प्रमुख को हटा भी दिया जाता लेकिन पाकिस्तान और उसके प्रधानमंत्री को तो ये बेइज्जती छूकर भी नहीं गई। शरीफ उतनी ही बेशर्मी से हंसते और अमेरिका के चरण में लोटते नजर आ रहे हैं।
क्या है अब्राहम समझौता
अब्राहम समझौते के तहत कुछ मुस्लिम देशों ने इजरायल के साथ रिश्ते सामान्य शुरु करने की शुरुआत की है जबकि कुछ अब इस दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं. अमेरिकी पहल पर 2020 में यूएई, बहरीन, मोरक्को और सूडान आदि ने इजराइल के साथ समझौते किए, इसी को आगे बढ़़ाते हुए ट्रंप चाहते हैं कि बाकी मुस्लिम देश भी इजराइल से रिश्ते सामान्य करें। यहां तक कि ट्रंप तो कह रहे हैं कि यदि ईरान भी इसमें जुड़ता है तो ये बहुत ही खास होगा। वहीं कई देश और संगठन इसके विरोध में कहते हैं कि इस समझौते से फिलिस्तीन मुद्दा उलझ जाएगा.