October 9, 2026
Film

‘Krantiveer’ नाना पाटेकर नहीं रहे

सुबह पांच बजे के आसपास मौत से 45 मिनट लड़ने के बाद आखिर हार मान ली नाना ने
फिल्मों के किरदार और अपनी असली जिंदगी में भी हीरो रहे नाना पाटेकर का गोवा में दिल के दौरे के बाद निधन हो गया। नाना को बचाने की लगभग हरसंभव कोशिश पौन घंटे तक की जाती रही लेकिन आखिर मौत की जीत हो गई। नाना पाटेकर हिंदी और मराठी सिनेमा के बिरले अभिनेता रहे जिन्होंने दमदार किरदारों से पहचान बनाते हुए तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और पद्मश्री जैसे सम्मान हासिल किए। नाना पाटेकर का असली नाम विश्वनाथ पाटेकर था और वे 1951 के पहले ही दिन दुनिया में आए थे। फिल्म निर्माण, निर्देशन और लेखन के लिए पहचान बनाने वाले नाना की पहली फिल्म 1978 की ‘गमन’ थी। ‘सलाम बॉम्बे, ‘परिंदा’,‘अंकुश’, ‘प्रतिघात’, ‘प्रहार’, ‘तिरंगा’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘खामोशी: द म्यूजिकल’, ‘अब तक छप्पन’, ‘अपहरण’, ‘राजनीति’, ‘वेलकम’ और ‘वेलकम बैक’ जैसी फिल्में उनके अभिनय की गवाही देती हैं और ‘क्रांतिवीर’ फिल्म ने तो उनके लिए एक नई छवि ही गढ़ दी थी। ‘क्रांतिवीर’, ‘परिंदा’ और ‘अग्निसाक्षी’ के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले। हिंदी के लिए चार फिल्मफेयर और दो फिल्मफेयर मराठी के लिए लेने वाले नाना को 2013 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। ‘प्रहार’ उनकी निर्देशकीय क्षमता की बानगी बनी। नाना भारतीय प्रादेशिक सेना से जुड़कर कैप्टन भी बने। कारगिल युद्ध में उन्होंने मराठा लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट में मेजर बतौर मानद सेवाएं भी दीं।