April 21, 2026
देश दुनिया

TCS Nashik मामले में कंपनी की सफाई- निदा एचआर मैनेजर नहीं थी

इतनी बड़ी संख्या में लोग गलत तरीके से धर्मांतरण कराने में जुटे थे लेकिन कंपनी की उन सब पर चुप्पी

टीसीएस नासिक में धर्मांतरण वाले मामले में कंपनी कह रही है कि निदा खान को बार बार एचआर मैनेजर कहा जा रहा है लेकिन वह प्रोसेस एसोसिएट थी। जबकि मामला सामने आने के बाद कुछ जगहों पर यह खबर भी फैलाई गई कि निदा तो सिर्फ एक टेलीकॉलर थी। टीसीएस कंपनी निदा को बचाने के लिए साफ तौर पर उतर आई है हालांकि कहने को उसे कंपनी ने उसे इंटरनल जांच तक सस्पेंड किया है लेकिन कंपनी के बयान अब भी वही हैं जो किसी भी तरह निदा के पक्ष में हों। टीसीएस का कहना है कि उसे एचआर मैनेजर कहना गलत है लेकिन कंपनी ययह बताने को तैयार नहीं है कि प्रोसेस एसोसिएट के तौर पर उसके पास क्या जिम्मेदारियां थीं क्योंकि कई कंपनियों में तो इस पद का व्यक्ति ही सबसे पहले कंपनी की तरफ से नए आने वाले व्यक्ति से मुलाकात करता है। दरअसल टीसीएस बताना चाह रही है कि निदा के पास भर्ती या नेतृत्व की जिम्मेदारी नहीं थी और यह कह कर कंपनी उस सच को झुठलाने पर आमादा है जिसमें धर्मांतरण का रैकेट साफ नजर आ रहा है। यदि निदा की अकेली की ही बात होती तो यह तर्क काम आ भी सकता था लेकिन यदि ऑफिस के कई कर्मचारी जिसमें ऊपर से नीचे तक के लोग शामिल हों तो कंपनी के इस बयान का कोई मतलब नहीं रह जाता। उलटा इससे तो वह बता रही है कि टीसीएस के नासिक कैंपस में हर स्तर पर कर्मचारी सिंडिकेट बनाकर धर्म परिवर्तन का एजेंडा चला रहे थे। कंपनी ने बताया है कि आंतरिक जाँच पूरी होने तक निदा खान को सस्पेंड कर दिया गया है। अब टीसीएस निदा की भूमिका को कमतर दिखाने की कोशिश में जी जान से जुटी हुई है लेकिन इस बात का जवाब उसके पास अब भी नहीं है कि आखिर शिकायतों पर कैंपस से लेकर मुख्यालय तक कहीं भी सुनवाई क्यों नहीं की गई और एक अच्छी कंपनी में काम करने का सपना देखने वाली जिन लड़कियों की जिंदगी खराब हुई है उस सबका जिम्मेदार कौन है। जहां तक सफाई देकर यह बताने की कोशिश है कि निदा का काम ज्यादा महत्व का नहीं था तो यह भी तो कंपनी माने कि जिनके पास महत्वपूर्ण दायित्व थे वो भी उसी काम में लगे हुए थे और एक दो नहीं बल्कि आधा दर्जन से ज्यादा लोग तो पूरे समय इसी पर ध्यान दे रहे थे कि कैसे, कब और किसको धर्मांतरित किया जा सकता है।