TCS Nashik में धर्मांतरण मामले में चौंकाने वाले खुलासे
बड़े अखबारों की हिम्मत ही नहीं हो रही कि टीसीएस से इतने गंभीर मामले में सवाल पूछ सकें
आखिर आपके अखबार में टीसीएस के नासिक कैंपस में हुए उस कांड का जिक्र क्यों नही हो राहीा है जिसे कॉर्पोरेट जिहाद कहा जा रहा है। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस की नासिक यूनिट में जबरन धर्मांतरण के गंभीर आरोप पर कंपनी ने कई कर्मचारियों को निलंबित किया है और यह मामला शुरु में जितना बड़ा लग रहा था उससे कहीं ज्यादा बड़ा और पैले हुए जाल का सामने आ रहा है। इसमें जो कुछ हो रहा था उससे टीसीएस का मुख्यालय अंजान हो यह बात गले नहीं उतरती और यहां के एचआर की भूमिका तो सीधे ही सवालों के दायरे में है क्योंकि कर्मचारी शिकायत भी कर रहे थे लेकिन किसी पर जानबूझकर ध्यान नहीं दिया गया। इतने बड़े मामले में जहां व्यवस्थित तरीके से टीसीएस जैसी नामी कंपनी में जिहाद चलाने के काम में बीसियों लड़कियों की जिंदगी खराब हुई है आखिर बड़े अखबार खबर तक देने से क्यों बच रहे हैं। पहले शिकायत हुई, फिर पुलिस ने अपनी टीम को कर्मियों के तौर पर भेजकर पुष्टि की जिसमें पता चला कि इस्लाम अपनाने के लिए लड़कियों पर बुरी तरह दबाव बनाया जाता था और उन्हें कितना कुछ सहन करना पड़ता था। इतने लंबे समय से चल रही प्रक्रिया की खबरें बड़े अखबार दबा क्यों रहे हैं यह समझना चाहिए। जाहिर है बात टीसीएस की है जो टाटा से जुड़ी कंपनी है और हर साल लाखों लाख के विज्ञापन टाटा की तरफ से इन अखबारों को मिलते हैं ऐसे में इनकी हिम्मत ही नहीं होती कि ये टीसीएस से कोई सवाल पूछ सकें। टीसीएस पर इस मामले में कई सवाल हैं क्योंकि यह उनके एक कैंपस की कोई छोटी घटना नहीं है बल्कि इसने कंपनी की गाइडलाइंस और इंटरनल ग्रीवेंस वाले रिड्रेसल सिस्टम को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है. यानी टीसीएस के कंपनी चलाने की गाइडलाइन और जवाबदेही से बचने वाले व्यवहार की आलोचना हो रही है. एक युवती ने जब 2022 से 2026 के बीच उत्पीड़न की शिकायत की तो परतें खुलनी शुरु हुईं जिसमें यह पता चला कि आसिफ अंसारी, शफी शेख, शाहरुख कुरैशी, रज़ा मेमन, तौसीफ अत्तर और दानिश शेख जैसे दरिंदे अपने खराब इरादों के चलते खास पैटर्न पर लड़कियों को कंपनी में नौकरी देते थे और इसके बाद उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए हर तरह से दबाव में लेते थे और इसमें खाने पीने से लेकर पहनावे की ही बात नहीं थी बल्कि भगवानों के बारे में गलत टिप्पणियां करने और जबरन गाय का मांस खिलाने जैसे मामले तक शामिल हैं। अब तक नौ एफआईआर हुई हैं और छह लोग पकड़े गए हैं जिनमें एक महिला भी शामिल है. टीसीएस ने 12 अप्रैल को जारी बयान में कहा है कि आरोपित कर्मियों को जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया गया है.
