Women Reservation Bill को नहीं मिल सके पर्याप्त वोट
12 साल में पहली बार ऐसा हुआ कि मोदी सरकार का कोई बिल पर्याप्त संक्ष्याय न जुटा सका हो
महिला आरक्षण विधेयक आखिर संसद से पास नहीं हो सका। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने वोटिंग के बाद कहा कि विधेयक दो-तिहाई सदस्यों के मत हासिल नहीं कर सका। 528 मतदान करने वाले सदस्यों में से 298 ने इसके समर्थन में वोट दिया और 230 ने इसका विरोध किया। लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन संशोधन विधेयक पर मेराथन चर्चा के बाद मतदान प्रक्रिया में 528 सांसद शामिल रहे, इनमें से इस विधेयक के पारित होने के लिए 352 वोट चाहिए थे जबकि 298 वोट ही इसे हासिल हुए, हालांकि इसमें भी एक तथ्य यह है कि एनडीए की सदन में ताकत 292 की ही है तो उसे छह अन्य सदस्यों ने समर्थन किया है। लोकसभा अध्यक्ष ने वोटिंग के नतीजे की घोषणा करते हुए कहा कि विधेयक आवश्यक समर्थन नहीं जुटा सका, इसलिए आगे की विधायी प्रक्रिया नहीं बढ़ाई जा सकती। दो अन्य विधेयकों पर सरकार ने मतदान न कराने का निर्णय लिया। बारह साल में पहली बार ऐसा हुआ है कि मोदी सरकार का संविधान संशोधन विधेयक पारित न हो सका हो। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने महिलाओं को सम्मान और अधिकार देने वाले इस विधेयक के गिर जाने पर खेद जताया और कहा कि विपक्ष ने साथ नहीं दिया जिसके चलते हमने एक ऐतिहासिक मौका गंवा दिया। इससे पहले बिल पर कई सदस्यों ने अपनी बात रखी और राहुल गांधी का भाषण इस बात के लिए चर्चा में रहा कि उन्हें बार बार अध्यक्ष द्वारा चेतावनी दी गई कि वे मुद्दे पर अपनी बात रखें लेकिन वे अपनी ही धुन में बात रखते गए। गृह मंत्री अमित शाह ने चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि जो लोग इन तीनों बिलों का विरोध कर रहे हैं वे एससी और एसटी की सीटें बढ़ने और महिलाओं को हक दिए जाने का ही विरोध कर रहे हैं।
