SC-ST Act के खिलाफ कुछ भी सुनने से सुप्रीम कोर्ट ने किया इंकार
एससी-एसटी एक्ट के प्रावधानों, मुआवजे और अग्रिम जमानत तक न होने जैसे मुद्दे उठाए गए थे याचिका में
सुप्रीम कोर्ट में एससी एसटी एक्ट के कुछ कठोर प्रावधानों के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने सुनने से इंकार कर दिया। याचिका में कहा गया था कि एक्ट के कई प्रावधान समानता के अधिकार के खिलाफ हैं इसलिए इन्हें बदला जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून को 2020 में तीन जजों की बेंच ने बरकरार रखा और इसमें कई सेफगार्ड हैं जो गलत मुकदमे के मामले में काम में आ सकते हैं। याचिकाकर्ताओं के वकील विष्णु जैन ने कहा कि इस कानून के चलते रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन यानी उलटा भेदभाव होने जैसे हालात बन रहे हैं। इस एक्ट के तहत मिलने वाले मुआवजे की व्यवस्था को लेकर बताया गया कि 493 करोड़ रुपये का भारी भरकम मुआवजा इस एक्ट के तहत दिया जा चुका है और ये प्रावधान ऐसा है कि इससे लोग समाज के दूसरे वर्ग पर एफआईआर दर्ज कराने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। जाहिर है कानून का दुरुपयोग हो रहा है। बृजभूषण सैनी और 18 अन्य याचिकाकर्ताओं ने याचिका में एससी एसटी एक्ट की धारा 3(1), 3(2), 4, 8, 18, 18-ए और 19 को चुनौती देते हुए कहा था कि ये संविधान द्वारा दिए गए समानता, जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता सहित कई कानूनी अधिकारों का उल्लंघन करते हैं।
याचिका में इस एक्ट के तहत एफआईआर व गिरफ्तारी के संबंध में भी साफ दिशा-निर्देश मांगे गए थे। इस एक्ट में अग्रिम जमानत के रास्ते प्रतिबंधित होने, झूठे या दुर्भावनापूर्ण आरोपों के मामले की बात भी याचिका में उठाई गई थी।
