April 2, 2026
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Silver Prices में चीन की सबसे ज्यादा चांदी

चांदी के निर्यात और इस्तेमाल को लेकर चीन ने नियम क्या बदले, कीमतों में आग ही लग गई

चांदी के भावों में हाल के महीनों में अभूतपूर्व तेजी देखने को मिली है। भारत में यह कीमतें 2.50 लाख प्रति किलो के पार पहुंच गई हैं और वैश्विक स्तर पर भी चांदी ने रिकॉर्ड बनाए हैं। इस उछाल के पीछे सबसे बड़ा कारण चीन की नीतियां हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति और मांग का संतुलन बिगाड़ दिया है। चीन ने 1 जनवरी 2026 से चांदी के सभी निर्यात के लिए सरकारी लाइसेंस अनिवार्य कर दिया है। इससे वैश्विक बाजार में चांदी की उपलब्धता घट गई। चीन दुनिया का सबसे बड़ा औद्योगिक उपभोक्ता है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और बैटरी निर्माण में चांदी का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है और खुद के चांदी उत्पादन का पचास प्रतिशत तो वह खुद ही इस्तेमाल कर लेता है जबकि इसकी मांग चीन मे लगातार बढ़ती ही जा रही है। जब मांग बढ़ रही हो और आपूर्ति पर नियंत्रण लगाया जाए तो कीमतें ऊपर जाएंगी ही। यह तय है कि आने वाले समय में चांदी की उपलब्धता और कठिन होगी। यानी चांदी अब सुरक्षित निवेश विकल्प मानी जा रही है। चीन की नीतियों का भू-राजनीतिक असर यह है कि अब सभी देशों को इससे जुड़े समीकरण बदलने पड़ रहे हैं। चीन अपनी नीतियों के जरिए वैश्विक धातु बाजार पर दबाव बना रहा है और अपनी औद्योगिक प्राथमिकताओं को आगे रख रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि 2026 में भी चांदी की कीमतों में अस्थिरता रहेगी। कुल मिलाकर, चांदी के बढ़ते भावों के पीछे चीन की नीतियां निर्णायक भूमिका में है। निर्यात पर नियंत्रण, औद्योगिक मांग का दबाव, वैश्विक निवेशकों का रुझान और भू-राजनीतिक तनाव मिलकर चांदी को नई ऊंचाइयों पर ले गए हैं।