Yuzvendra Chahal ने क्या वाकई प्लेन में ई सिगरेट फूंकी थी
अर्शदीप के व्लॉग से सामने आई घटना के बाद बीसीसीआई और विमानन कंपनी मामले को दबाने में लगीं
क्रिकेट के जिन सितारों को युवा आदर्श मानते हें उन्हीं में से कुछ की हरकतें तो ऐसी हैं कि उन्हें जेल की सलाखों के पीछे होना चाहिए। हाल ही में युजवेंद्र चहल पर आरोप लगा है कि वो फ्लाइट में ई सिगरेट फूंक रहे थे जिसे वेपिंग कहा जाता है। यह वीडियो भी सामने नहीं आता यदि अर्शदीप सिंह के व्लॉग के सोशल मीडिया पर आते ही यूजर्स इस पर गौर नहीं कर लेते। अब तक चहल ने इस मामले में चुप्पी साध रखी है। ज्यादा समय नहीं हुआ जब राजस्थान रॉयल्स के कप्तान रियान पराग को ड्रेसिंग रूम में वेपिंग करते हुए देखा गया था और इस घटना पर बीसीसीआई ने संज्ञान लेते हुए उन पर जुर्माना भी लगाया था लेकिन युजवेंद्र के मामले में शायद बीसीसीआई भी लीपापोती ही करने में लगी है क्योंकि बजाए यजुवेंद्र के खिलाफ कुछ करने के, बीसीसीआई ने अर्शदीप सिंह को व्लागिंग न करने की हिदायत दे डाली है। हालांकि बीसीसीआई का कहना है कि उसने इस घटना को गंभीरता से लेकर सख्त गाइडलाइंस लागू की हैं। सवाल तो एयरलाइंस द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने पर भी है क्योंकि भारत में ई-सिगरेट और वैपिंग को प्रोहिबिशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट्स, 2019 के तहत प्रतिबंधित किया गया है और प्लेन में तो ऐसी हरकत करना बेहद गंभीर मामला हो जाता है। सवाल यह भी है कि यदि युजवेंद्र ने सच में ये हरकत की है तो वे विमान में वैपिंग डिवाइस लेकर कैसे चढ़े और सुरक्षा नियमों का क्या हुआ जिसके चलते इसकी इजाजत ही नहीं होती कि वे ई सिगरेट लेकर प्लेन बोर्ड कर सकें। यदि चहल पर प्लेन में वैपिंग के आरोप साबित हो जाते हैं तो उन्हें एक साल तक की जेल या जुर्माना हो सकता है लेकिन स्टार खिलाड़ी होने के चलते ऐसा लग रहा है कि उन पर कार्रवाई से बचा जा रहा है। भारत के पूर्व स्पिनर लक्ष्मण शिवरामकृष्णन ने चहल की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि उन्हें नियमों के उल्लंघन पर उचित सजा मिलनी चाहिए और यदि कानून लागू ही नहीं करना है तो फिर उन्हें बनाने का क्या फायदा है। क्रिकेट के नियमों में यह लेवल वन का अपराध माना जा सकता है लेकिन भारतीय कानूनों के मुताबिक चहल की ऐसी कथित हरकत बड़ी सजा के लायक है लेकिन अब उन्हें हर स्तर पर बचाने की कोशिश हो रही है।
