May 5, 2026
देश दुनिया

Bhratiya Janta Party के लिए पश्चिम बंगाल की जीत क्यों है खास

कोलकाता के एक साधारण घर में 1950 में हुई एक मुलाकात का 2026 की इस जीत से नाता क्या है

पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जिस अंदाज में ममता बनर्जी को हराया है उसका अंदाजा भी कथित सैफोलॉजिस्ट नहीं लगा पा रहे थे, अब नौ मई को पहले भाजपाई मुख्यमंत्री के पश्चिम बंगाल की कमान संभालने की तैयारी है लेकिन इस जीत के साथ ही हमें 75 साल पहले की एक मुलाकात का जिक्र जरुर करना चाहिए जो कि इसी कोलकाता की गलियों के साधारण से मकान में हुई थी। 1950 में गुरु गोलवलकर की आज के प्रज्ञा भवन में श्यामा प्रसाद मुखर्जी से मुलाकात हुई थी। इन दोनों की मुलाकात में संगठन का रंग तब चढ़ा जब अटल बिहारी वाजपेयी भी इनके विचार से सहमत हुए। यहां से वह राह खुली जिसने 1951 में जनसंघ को खड़ा करने की नींव रखी। अगले ही साल हुए चुनाव में जनसंघ ने तीन सीटें हासिल भी कर लीं और यही जनसंघ समय के साथ 1977 में जो जनता पार्टी बनी जो 1980 में टूट कर भारतीय जनता पार्टी बनी और यही भाजपा ममता की सत्ता हटाकर पहली बार पश्चिम बंगाल में सत्ता संभालने जा रही है। भाजपा के लिए यह हमेशा से एक बड़ी चुनौती थी कि जहां से डॉ मुखर्जी के विचार ने उसे जन्म दिया उस जगह कभी पार्टी जीत हासिल नहीं कर पाती है। पहले कांग्रेस, उसके बाद लेफ्ट और फिर तृणमूल ने भाजपा के लिए यहां कोई गुंजाइश बनने का मौका ही नहीं छोड़ा था लेकिन इस बार भाजपा नेतृत्व ने तय कर लिया था कि जान झोंककर भी जीत के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना है। सच यह है कि भाजपा के पोस्टर पर चमक रहे बड़े नेताओं से ज्यादा यह जीत उनकी है जिनकी जान खतरे में थी फिर भी वे भाजपा के लिए लड़ते रहे। दमन के मामले में ममता बनर्जी की पार्टी बेहद क्रूर तक रही लेकिन कुछ दीए टिमटिमाते रहे जिन्होंने भाजपा नेतृत्व को इन्हें मिलाकर लौ बनाने का मौका दिया। भाजपा के लिए यह जीत इसलिए काफी बड़ी है क्योंकि यह लंबे समय से चजी आ रही खलिश के खत्म होने जैसा अहसास है।