September 11, 2026
वर्ल्ड

World Trade Center हमले यानी 9-11 के पच्चीस साल

अमेरिका से ‘मनजी ‘का लेखन

आज न्यू यॉर्क ट्विन टावर हमले के पच्चीस साल पूरे हुए है। आज ही वो मनहूस दिन था जब अनेक अमेरिकी निर्दोष लोग आतंक की भेंट चढ़ गए थे।

जब ये हमला हुआ तो कॉलेज में था और टीवी पे देख अंदाज़ा लगाया कि इस हमले से अमेरिका जैसे देश को कितना धक्का लगा होगा। ये अंदाज़ा असलियत में बदला जब ख़ुद इस देश में आया और अनेक लोगों से बात की। इस संदर्भ में एक बुजुर्ग पड़ोसी से काफ़ी बात होती थी जो काफ़ी पोलिटिकली वेल कनेक्टेड और अवेयर थे। बुजुर्ग से हुई बातचीत के कुछ अहम पहलू आप सभी से सांझा करता हूँ।

बुजुर्ग का कहना था – नौ ग्यारह महज़ एक हमला नहीं था। ये अमेरिकी स्पिरिट को तोड़ने का वो षड्यंत्र था जो बहुत हद्द तक कामयाब हुआ भी। वे बताते थे- इस हमले से पहले अमेरिका में एयरपोर्ट पे सिक्योरिटी ना के बराबर होती थी। लोग अपने निकट संबंधियों को ड्राप करने प्लेन गेट तक जा सकते थे। एयरपोर्ट पे पहचान पत्र आदि भी दिखाने की जरूरत ना होती थी। किंतु इस हमले के बाद एयरपोर्ट पे सख्त सिक्योरिटी चेकिंग होनी लगी। यात्रियों को काफ़ी पहले एयरपोर्ट जाने के किए बाध्य होना पड़ा!

यही नहीं- डीएचएस का गठन भी इसके बाद हुआ। टीएसए का भी गठन इस कांड के उपरांत हुआ। अमेरिका में बैंकिंग काफ़ी आसान होती थी। किंतु इस घटना के बाद केवाईसी चलन में आया, बैंक कस्टमर के प्रति सजग हुई- पहचान के अतिरिक्त पैसे का सोर्स भी जांचा जाने लगा।

बुजुर्ग कहते है- पहले स्कूल दफ्तर आदि में डिजास्टर मैनेजमेंट इतने वृहद रूप में नहीं था किंतु इसके बाद हर बिल्डिंग में होने लगा। साइबर सिक्योरिटी के आयाम बढ़े, नए नए क़ानून गठित हुए, फायर फाइटर और इमरजेंसी ड्रिल बढ़े। कुल मिला कर देश ने ख़ुद को इतना बदला कि अगले हमले के लिए तैयार हो गए।

लेकिन बुजुर्ग का एक वाक्य मेरे पटल में सदैव के लिए अंकित हो गया। उनका कहना था- इस घटना से पहले हमें लगता था हमारा देश दुनिया का सबसे सुरक्षित देश है क्यूंकि देश के दोनों तरफ़ समुद्र हमारी रक्षा करता है। लेकिन इस घटना ने वो भ्रम तोड़ दिया। और जब आदमी महफ़ूज़ ना समझे तो वो ख़ुद को हथियारों से लैस करना शुरू करता है। इस वाक्य में दरअसल बहुत गहराई है !

बुजुर्ग पड़ोसी का कहना था- ये घटना अमेरिकी माइंडसेट को झकझोरने के लिए काफ़ी थी। इस से देश का ट्रांसपोर्ट, सिक्योरिटी, क़ानून, नियम, दफ़्तर स्कूल सब बदल गए। और इस घटना के पच्चीस साल बाद ही उस शहर के लोगों ने अपना मेयर चुन लिया- ये दर्शाता है- इस घटना के चलते देश बदला और बदले लोगों की मानसिकता ने अपना मूल स्वभाव बदला!

खैर- नौ ग्यारह का अपराधी उसामा बिन लादेन था। ओसामा बिन लादेन का अब्बा मोहम्मद बिन अवद बिन लादेन की सितंबर 1967 में दक्षिण-पश्चिमी सऊदी अरब के असीर क्षेत्र में एक विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। ओसामा का बड़ा भाई सालेम बिन लादेन की भी मई 1988 में अमेरिका में एक विमान दुर्घटना में मृत्यु हुई थी। और क्या ये इत्तेफाक था कि नौ ग्यारह की घटना भी कुछ ऐसी ही प्लान की गई थी!

जब ये घटना हुई थी , उसके उपरांत उत्तर प्रदेश और बिहार में पैदा होने वाले बच्चों के नाम उसामा रखे जाने लगे थे। एक बड़े नेता उसामा का हमशक्ल लेके रैली करते और हस्त चिह्न दल के एक नेता उसे उसामा जी कह कर इज्जत बख़्शते थे!

पच्चीस साल बाद आज बस यही प्रार्थना है कि इस घटना में मारे गए निर्दोष लोगों की आत्मा को शांति मिले!