Kejriwal को शराब मामले की सुनवाई में याद आया गांधी का सत्याग्रह
कम क्यों नहीं होती केजरीवाल की नौटंकी
केजरीवाल की जब से दिल्ली की सीएम वाली कुर्सी गई है तब से उनका ज्यादा समय पंजाब में ही बीता है क्योंकि वहां उन्हें सुपरसीएम का ट्रीटमेंट मिलता है। इस बीच शराब घोटाले का जिन्न पीछा नहीं छोड़ रहा है तो उन्हें लगा अब दिल्ली में भी आना जाना लगा ही रहेगा तो उन्होंने वह सरकारी बंगला भी ले लिया जो पूर्व मुख्यमंत्री के नाते उन्हें मिला। पिछले कुछ समय में उनके पास जो रुकने के लिए बंगला था वह जिस सांसद को अलॉट था उसने भाजपा का दामन थाम लिया तो भी केजरीवाल के लिए दिल्ली में घर बदलना जरुरी हो गया था। केजरीवाल ने शराब घोटाले में खुद ही पैरवी करने की बात कही और उसमें सबसे पहली मांग यह रखी कि जज साहिबा उनके केस से हट जाएं। जब उनकी यह अर्जी नहीं मानी गई तो अब उन्होंने नए सिरे से मुद्दा यह बना दिया है कि अब तो अदालत में न मैं जाऊंगा और न ही मेरी तरफ से कोई वकील जाएगा उसके बाद नतीजा चाहे जो हो। केजरीवाल इसे गांधीजी की तरह सत्याग्रह बताते फिर रहे हैं और आज तो वो राजघाट पर भी मनीष सियोदिया को लेकर पहुंचे ताकि गांधीजी को बता सकें कि भले हमने आपकी शराबबंदी वाली बात नहीं मानी लेकिन बकवास मांगों के मामले में हम सत्याग्रह कर रहे हैं। न जाने क्यों केजरीवाल यह समझना ही नहीं चाह रहे हैं कि उनकी नौटंकियां अब पूरा देश समझ चुका है और बाकी समर्थक तो छोड़िए आपके ही बनाए हुए दो तिहाई से ज्यादा राज्यसभा सांसद आप से हाथ छुड़ाकर भाजपा की शरण में चले गए हैं। केजरीवाल ने भले न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में पेश न होने को पत्र बताया है कि वे या उनके वकील कोर्ट में नहीं होंगे, इसके बाद जो भी फैसला आएगा उसे लेकर वे सुप्रीमकोर्ट का रुख कर लेंगे। केजरीवाल अब भिड़ने की उस कगार पर हैं जहां वे यह भी याद नहीं रख रहे कि ट्रायल कोर्ट से राहत मिलने के बाद आरोपित को एक बॉन्ड देना होता है, कि अपील में वह कोर्ट में पेश होगा। केजरीवाल पेश नहीं हुए तो यह बांड का उल्लंघन होगा। ऐसे मामलों में अक्सर वारंट जारी किए जाते हैं और कोर्ट एक्स-पार्टी निर्णय लेने का भी कदम ले सकती है। राजनीतिक तौर पर भले कोर्ट के खिलाफ कथित सत्याग्रह केजरीवाल को फायदे का सौदा लग रहा हो क्योंकि इससे वो मीडिया की सुर्खियों में बने रह सकते हैं लेकिन कानूनी तौर पर यह बड़ी जोखिम भी हो सकती है, वैसे भी केजरीवाल की हरकतें जनता इतने समय से देख समझ ही रही है और बाकी की बातें आम आदमी पार्टी से निकले लोग बता देते हैं चाहे वो राज्यसभा सांसदों की टोली हो या आप के फाउंडिंग मेंबर्स ही क्यों न हों।
