April 15, 2026
देश दुनिया

Kejriwal ने जिस तरह से जज पर सवाल उठाए वह शर्मनाक है

केजरीवाल ने दस आरोप लगाए लेकिन जज ने एक सवाल पूछ लिया तो जवाब देते नहीं बना, उनके तर्क उन पर ही पड़ रहे भारी

  • आदित्य पांडे

केजरीवाल ने एक जज पर सीधे सवाल उठाते हुए कल कोर्ट रुम में खुद की पैरवी करते हुए कहा कि आप संघ समर्थित एक संस्था के कार्यक्रम में चार बार गईं इसलिए मुझे आपसे न्याय की उम्मीद नहीं है। यह शायद पहली बार हो रहा होगा कि एक पूर्व मुख्यमंत्री खुद की पैरवी करते हुए कोर्ट रुम में खुद यह बात इतने भद्दे तरीके से कहते हुए जज को केस से हट जाने के लिए कह रहा हो। ऐसा नहीं कि इससे पहले ऐसे कभी सवाल न उठे हों लेकिन जब एक आईआईटी से पढ़ा हुआ, सरकारी अफसर रह चुका, लंबे समय तक एनजीओ चला चुका और नई पार्टी बनाकर उससे अर्ध राज्य की पूरी सरकार चला चुका व्यक्ति ऐसी बात कह रहा हो। जज ने काफी समय दिया यहां तक केजरीवाल ने इस मौके को नैरेटिव सेट करने की तरह भी इस्तेमाल करने की कोशिश की हालांकि इसमें उन्हें ज्यादा सफलता नहीं मिली लेकिन वो जो चाहते थे वह तो कहने में सफल ही रहे। दरअसल इंडी गठबंधन नाम से जो विपक्ष का गठजोड़ बचा है उसके हर दल की कोशिश यही है कि हर स्तंभ को कमजोर और पक्षपाती बताया जाए ताकि आम जनता को किसी भी तरफ भरोसा नहीं रह जाए। ऐसा कोई भी स्तंभ जिससे लोगों की जरा भी उम्मीद बने, विपक्ष उस पर प्रहार करने से नहीं चूक रहा है। गोदी मीडिया का जुमला उछालकर मीडिया पर हमले किए जा रहे हैं जबकि गोदी में मीडिया को खिलाने के सैकड़ों उदाहरण हमारे सामने तब के हैं जब सरकारें एक पार्टी और एक परिवार के इर्द गिर्द घूमती थीं। लगातर चुनावों में मात खाने के बाद आप याद कीजिए कि क्या कोई ऐसा खंभा बचा है जिस पर खिसियानी बिल्ली हमलावर न रही हो। जिस अंदाज में केजरीवाल ने कोर्ट के सामने बातें रखी हैं वो अपनी जान केस से छुड़ाने के लिए कम और न्यायपालिका पर भरोसे के तार तोड़ने के लिए ज्यादा नजर आ रही थी। संयम से काम लेते हुए जज ने किसी भी आम व्यक्ति से ज्यादा समय और बोलने का मौका केजरीवाल को शायद इसीलिए दिया कि इतना तो समझा जा सके कि इस आदमी के अंदर कितना कुछ गड़बड़ भरा हुआ है। जितने सवाल केजरीवाल ने उठाए उसके बदले में जज की तरफ से एक ही सवाल आया और उसका जवाब देने में ही केजरी लड़खड़ा गए और यदि कोर्ट में केजरीवाल से उतने ही सवाल कर लिए जाते जितने उन्होंने पूछे तो शायद वो भाग ही खड़े होते। लगता तो यही है कि कोर्ट को केजरीवाल से कम से कम एक और सवाल पूछना चाहिए था जिसमें यह तो साफ हो ही जाता कि क्या कोर्ट में जिन मामलों के फैसले उनके पक्ष में गए हैं उन जजों पर ही ऐसे सवाल नहीं उठाए जा सकते हैं। फिर तो यह भी सवाल होगा कि क्या जज के रिकॉर्ड चेक कर ही केस पर काम होता है या कुछ खास तरह की सेटिंग वाले ही वकीलों का भी केजरीवाल इतना ही ध्यान रखते हैं। ऐसे भी वकील केजरीवाल के पक्ष में पैरवी कर चुके हैं जिनकी सीडी में जज बनवाने के लिए कुछ खास शर्तें मनवाने की बात सामने आ चुकी है तो क्या केजरीवाल के वकील ऐसे न्यायाधीशों के सामने ही केस पेश करते थे और अपने मुवक्किल के पक्ष में फैसले लिया करते थे। चूंकि सवाल इस बार खुद केजरीवाल ने उठाए हैं और राजनीतिक तौर पर नहीं बल्कि अदालत में जज पर सीधे आक्षेप लगाते हुए कोर्ट रुम में बोले हैं तो जाहिर तौर पर उन्हें भी कुछ सवालों के जवाब देने ही चाहिए। बार बार उन्होंने कहा कि सीबीआई ने हमें बेईमान मान ही लिया है लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि बेईमान मानने की वजहें कितनी ठोस रही होंगी कि आप पर एक के बाद एक न सिर्फ केस हुए बल्कि चार्जशीट भी आईं और आपने तिहाड़ का आनंद भी इसी सिलसिले में उठाया। अब यदि केजरीवाल कोर्ट के फैसले का हवाला देकर कहें कि हम पर लगे आरोपों को तो एक अदालत ने सही नहीं माना तो उसके काउंटर में सवाल यही होगा कि वह भी एक अदालत ही थी और उसमें फैसले देने वाले भी कभी किसी सेमिनार वगैरह में जाकर बेठे होंगे, हो सकता है सेमिनार कराने वाले के लिंक भी किसी खास विचारधारा वाले बड़े संगठन से जुड़े रहे हों। केजरी तर्क के हिसाब से तो यह फैसला भी गलत ही होगा और ऐसे में केजरीवाल के खिलाफ वाले पक्ष को भी न्याय की उम्मीद नहीं करनी थी। उस पक्ष को भी जज से साफ कहना चाहिए था कि आपकी विचारधारा हमें तो आम आदमी पार्टी की विचारधारा से मिलती हुई लगती है इसलिए हमें आपसे न्याय की उम्मीद नहीं है।