Bhojshala मामले की सुनवाई अब 6 अप्रैल से रोज होगी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हाइकोर्ट ही तथ्यों और दावे आपत्तियों को लेकर सुनवाई करे
धार की भोजशाला को लेकर चल रहे कोर्ट केस में अब 6 अप्रैल से रोज सुनवाई होगी, मामले से जुड़ी सभी याचिकाएं एक साथ सुनी जाएंगी। पहले याचिकाकर्ताओं के तर्क होंगे, फिर आपत्ति लगाने वालों की दलील होंगी। भोजशाला को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हाईकोर्ट ही इसका अंतिम फैसला लेगा। सुप्रीम कोर्ट ने अपने अहम आदेश में कहा था कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की सर्वे रिपोर्ट, वीडियोग्राफी और आपत्तियों को हाईकोर्ट ही देखेगा। एएसआई की सर्वे रिपोर्ट सभी पक्षों को दे दी गई है और कुछ पक्षों ने आपत्तियां दर्ज कराई हैं। शीर्ष कोर्ट ने पहले के निर्देश को बरकरार रखते हुए कहा था कि इस परिसर के स्वरूप में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। एएसआई की रिपोर्ट में परिसर के ऐतिहासिक स्वरुप, स्थापत्य और शिलालेखों से पता चला है कि इनमें से अधिकतर 10वीं से 13वीं शताब्दी के दौरान राजा भोज और राजा अर्जुन वर्मन द्वारा बनवाए गए हैं। पूरे परिसर में कुल 106 स्तंभमिले हैं, जिन पर नक्काशी और डिजाइन के साथ 32 शिलालेख भी प्राप्त हुए हैं। शिलालेखों में राजा भोज के समय लिखित और अर्जुन वर्मन के समय रचित ‘पारिजलमंजरी नाटिका’ और ‘विजयश्री’ नाटक के अंकों का भी उल्लेख है। कुछ शिलालेखों में 14वीं शताब्दी के दौरान मालवा में मुसलमानों के आने और शासन का जिक्र भी है यानी 1389 ईस्वी में दिलावर खान उर्फ हुसैन को मालवा प्रांत में भेजे जाने के और बाद में 1401 में उसके शाही उपाधि लेकर स्वतंत्र रुप से राज्य चलाने के ऐतिहसिक तथ्यों का भी साम्य मिलता है। अब ऐतिहासिक और कानूनी परिप्रेक्ष्य में इन संदर्भों पर बहस की संभावना है।
