Petrol-Diesel से एक्साइज ड्यूटी दस रुपए घटी
ऊर्जा संकट के बीच सरकार का बड़ा कदम, खुदरा कीमतें घटेंगी नहीं तो बढ़ेंगी भी नहीं
ईरान युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें पचास प्रतिशत की बढ़ी हैं और कई देशों ने खुदरा कीमतें । बढ़ा भी दी हैं लेकिन सरकार ने पेट्रोल और डीजल की दस दस रुपए से एक्साइज ड्यूटी कम करने का फैला किया है। पेट्रोल पर अब तक यह ड्यूटी 13 रुपए प्रति लीटर की दर से लगती थी जो अब तीन रुपए रह जाएगी जबकि डीजल पर प्रति लीटर दस रुपए लगने वाली एक्साइज ड्यूटी शून्य हो जाएगी। भारत कुल कच्चे तेल की जरूरत का करीब 88 प्रतिशत और सीएनजी का पचास प्रतिशत आयात करता है तो बढ़ी कीमतों का प्रभाव सीधे कंपनियों पर पड़ रहा था और उनका घाटा बढ़ता जा रहा था, निजी क्षेत्र की नायरा एनर्जी ने कीमतें बढ़ा भी दीं जबकि एचपी, बीपी, रिलायंस, बीपी जिओ को भी भारी घाटा हो रहा था। भारत अपनी तेल जरुरतों का अस्सी प्रतिशत तक और प्राकृतिक गैस का भी लगभग आधा हिस्सा आयात से पूरा करता है। सरकार ने तेल विपणन कंपनियों को राहत देने के लिए वित्त मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाने का फैसला किया। एचपीसीएल, बीपीसीएल और आईओसी जैसी तेल विपणन कंपनियों को राहत इसलिए देना जरुरी था क्योंकि इन पर अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी के बाद भी घरेलू बाजार में दाम स्थिर रखने का दबाव था। इस ड्यूटी कटौती से आम उपभोक्ताओं को पेट्रोल पंप पर तुरंत कीमतें कम होने की उम्मीद नहीं है लेकिन खुदरा कीमतें बढ़ाने का दबाव जरुर इससे कम होगा। सरकार ने एक बयान में यह भी बताया है कि देश में तेल का पर्याप्त स्टॉक है, तेल का 74 दिन और एलपीजी सिलेंडर का 30 दिन का स्टॉक उपलब्ध है। देश के तीन स्ट्रैटेजिक रिजर्व में 3.372 मिलियन टन तेल है जो पर्याप्त हैं जबकि घरेलू उत्पादन भी 25 प्रतिशत से बढ़ाया जा रहा है।
