July 22, 2026
देश दुनिया

POCSO ACT के केस में दोषियों के बजाए पुलिस पर कर दी कार्रवाई

भास्कर एमडी व अन्य के खिलाफ एमपीनगर थाने में एफआईआर क्या दर्ज हुई ‘डायरेक्ट आईपीएस’ को ही कर दिया पीएचक्यू में अटैच

आपको लगता हो कि कानून सभी के लिए एक समान है तो आप दैनिक भास्कर का वह मामला देख लें जिसमें पॉक्सो एक्ट के उल्लंघन जैसे गंभीर मामले में बजाए पुलिस की कार्रवाई के पुलिस वाले पर ही कार्रवाई हो गई। दरअसल पांच साल की बच्ची से जुड़े संवेदनशील मामले की रिपोर्टिंग करते हुए भास्कर ने यह भी ध्यान नहीं रखा कि बच्ची की पहचान किसी भी तरह से उजागर नहीं होनी चाहिए। खबर सामने आने के बाद जयपुर की वकील रितिका पारीक ने भास्कर के एमडी सुधीर अग्रवाल और संबंधित क्राइम रिपोर्टर पर पॉक्सो एक्ट समेत अन्य गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई थी। खबर में ऐसे विवरण थे जिनसे पीड़ित बालिका की पहचान जाहिर होती थी। जाहिर है मामले में पुलिस को त्वरित कार्रवाई करते हुए दोषियों पर कानून का शिकंजा कसना था लेकिन भास्कर के रसूख के आगे दम तोड़ते हुए पुलिसिया कार्रवाई अपने ही डायरेक्ट आईपीएस के खिलाफ हो गई जिन्होंने एमपीनगर थाने में मामले को दर्ज हो जाने दिया। यानी बजाए दोषियों पर कार्रवाई करने के पुलिस ने अपने ही आईपीएस लेवल के अफसर पर कार्रवाई करते हुए उन्हें सजास्वरूप पीएचक्यू में अटैच कर दिया। सात मई 2026 की खबर में पॉक्सो एक्ट का ध्यान न रखते हुए भास्कर ने बच्ची के ऐसे विवरण प्रकाशित किए गए, जिनसे उसकी पहचान साफ हो रही है। खबर को लेकर शिकायत जयपुर के बजाज नगर थाने से एफआईआर दर्ज होकर प्रकरण भोपाल भेज दिया गया। पॉक्सो, किशोर न्याय अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता में बाल यौन अपराधों के पीड़ितों की पहचान उजागर किए जाने को लेकर सख्त प्रावधान हैं। शिकायत में सुधीर अग्रवाल और रिपोर्टर पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 72 (1), पॉक्सो एक्ट की धारा 23(2) तथा किशोर न्याय अधिनियम की धारा 74 के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। मामले में जयुपर पुलिस पर भी सवाल उठे क्योंकि वहां भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई, जब बात वरिष्ट स्तर तक पहुंचाई गई तब जाकर मामला भोपाल के एमपीनगर थाने पर भेजा गया। एफआईआर में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों का हवाला देते हुए बताया गया है कि ऐसे मामलों में मीडिया संस्थानों के लिए तय दिशा-निर्देश का इस मामले में उल्लंघन किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि समाचार डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी है और एक संवेदनशील मामले में पत्रकारिता संबंधी चूक ही नहीं बल्कि कानूनी दिशा निर्देशों का साफ उल्लंघन है।
भास्कर के लिए कानून अलग क्यों
दैनिक भास्कर के लिए यह पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी वह जानबूझकर तय दिशा निर्देशों के खिलाफ काम करता रहा है और इसमें पॉक्सो जैसे केस भी शामिल हैं। यहां तक कि जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के दौरान तो इस अखबार के समूह संपादक ने बहुत गर्व के साथ एक सेशन में यहां तक कह दिया था कि लोगों पर एक पॉक्सो केस हो तो तुरंत गिरफ्तारी हो जाती है और यहां मुझ पर कई ऐसे केस हैं और ये देखिए मैं आपके सामने बैठा हूं। जब जब ऐसे मामले हुए हैं, भास्कर के एमडी के नाते सुधीर अग्रवाल का भी नाम शामिल रहा है लेकिन न संपादक या संबंधितों पर कोई कार्रवाई हुई और न मालिकों पर।