September 13, 2026
देश दुनिया

BRICS दिल्ली का 18वां सम्मेलन बेहद खास

पुतिन ने जी 7 पर तंज करते हुए कहा किस बात का ग्रेट है जी7 जबकि ब्रिक्स की भागीदारी कहीं ज्यादा है दुनिया की बढ़त में

ब्रिक्स दिल्ली में हो रहा 18 वां सम्मेलन बेहद खास हो गया है क्योंकि यहां इसके सदस्यों ने जिस तरह से नए वर्ल्ड ऑर्डर की इबारत लिखनी शुरु की है वह काफी कुछ कहती है। पुतिन ने तो आते ही सवाल दाग दिया कि जिस जी 7 की सबसे ज्यादा बात होती है वह वर्ल्ड जीडीपी में सिर्फ 29 प्रतिशत का भागीदार है और ब्रिक्स चालीस प्रतिशत भागीदारी वाले देशों का समूह। भारत ने ब्रिक्स के मूल विचार को नए सिरे से रखते हुए इसे बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी के प्रथम अक्षरों से परिभाषित किया है। यह नया मंत्र मौजूदा वैश्विक संकटों में विकास का नया एजेंडा सेट करेगा। खाद्य, स्वास्थ्य, ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखला संकट के समय भी जारी रहें। एआई, डिजिटल तकनीक और स्टार्टअप के साथ समाधान तलाशने, देशों के बीच सहयोग को प्राथमिकता, अनुभव तथा संसाधनों की साझेदारी, टिकाऊ विकास, जलवायु परिवर्तन, स्वच्छ ऊर्जा बढ़ाने जैसे मुद्दों पर ब्रिक्स देश सहमत हो जाते हैं तो यह अपने आप में बड़ी बात होगी। ब्रिक्स सम्मेलन को महज चर्चा से आगे एक रचनात्मक और समाधानकारी मंच बतौर सामने रखने की कोशिश है। ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात जैसे पूर्ण सदस्य देशों में दुनिया की आधी आबादी रहती है।
दुनिया के व्यापार में 26 प्रतिशत हिस्सेदारी वाले इस समूह को नजरअंदाज इसलिए भी नहीं किया जा सकता क्योंकि प्राकृतिक संसाधन, विशाल उपभोक्ता बाजार, उन्नत तकनीकी क्षमताओं के मामले में भी ये देश अग्रणी हैं। आर्थिक विकास को देखें तो दुनिया में 50 प्रतिशत से ज्यादा वृद्धि ब्रिक्स देशों से है, जबकि जी-7 केवल 18 प्रतिशत का भागीदार है।