August 12, 2026
देश दुनिया

Yashwant Verma घर में बोरों से भरे नोट जलने वाले मामले में दोषी

यह नहीं बता पाए कि ये नोट वहां क्यों थे, किसके थे और क्यों थे। सबूत भी जानबूझकर मिटाए गए

जज के घर बोरों में भरे नोट जलने के मामले में लोकसभा अध्यक्ष ने जो जांच समिति बनाई थी उसके निष्कर्षों में यशवंत वर्मा पर लगे तीनों बड़े आरोप सही पाए गए हैं। रिपोर्ट में उन्हें दोषी माना गया है और इस मामले में वर्मा को फंसाने की साजिश जैसे भी कोई सबूत नहीं मिले हैं जैसे कि आरोप वर्मा ने फंसने के बाद लगाए थे। जांच समिति ने नकदी की मौजूदगी, साक्ष्यों को मिटाने की कोशिशों और वर्मा के इस बारे में स्पष्टीकरणों से यही तथ्य सामने आया है कि ‘पूर्व जस्टिस’ वर्मा दोषी हैं। तुगलक क्रिसेंट स्थित वर्मा के आधिकारिक आवास पर पांच सौ के हजारों नोट बोरों में भरे मिले थे जिन्हें लेकर वर्मा बता नहीं सके कि ये नोट वहां कैसे पहुंचे, क्यों थे और किसके थे। समिति ने पाया कि कानूनी तरीके से जगह को सील करने से पहले ही आग लगने वाली जगह यानी स्टोररूम के हालात बदलकर सबूत मिटाने की कोशिश की गई। समिति ने अपने निष्कर्ष में कहा कि जवाब में वह स्पष्टता, पारदर्शिता और जिम्मेदारी नहीं दिखी। वर्मा के जवाब टालमटोल वाले थे और असंतोषजनक भी। लोकसभा अध्यक्ष के निर्देश पर बनी समिति में न्यायमूर्ति अरविंद कुमार, बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति और वरिष्ठ अधिवक्ता बीवी आचार्य थे। समिति ने मई में रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष को सौंपी थी। समिति ने रिपोर्ट में वर्मा पर लगे तीनों आरोपों को सही साबित माना है। इनमें नकदी पर संतोषजनक स्पष्टीकरण न मिलना, साक्ष्य मिटाने और असंतोषजनक जवाब शामिल हैं।