Pakistan ने शांति समझौते में किया है धोखा
अमेरिका और ईरान को असली शर्तें न बताकर धोखा दिया लेकिन अब बढ़ रही मुश्किलें क्योंकि दोनों अपनी शर्तों पर अडिग हें
पाकिस्तान जिस संघर्ष विराम को लेकर कल से अपनी कॉलर ऊंची किए घूम रहा है उसे लेकर हकीकत तो दो घंटे बाद ही सामने आने लगी थी लेकिन अब तो इसमें मुश्किल पेंच सामने आने लगे हैं और व्हाइट हाउस से प्रवक्ता ने तो यहां तक कह दिया है कि शांति समझौते को अमेरिका ने खिड़की से बाहर फेंक दिया है। कल जो शाहबाज शरीफ अपनी तारीफ में कह रहे थे कि पूरी दुनिया पाकिस्तान की जितनी वाहवाही कर रही है उतनी कभी पाक को नहीं मिली लेकिन हकीकत यह है कि ईरान और अमेरिका दोनों ने ही अपनी अपनी मांगों को लेकर रुख कड़ा कर दिया है और दोनों ने ही पाकिस्तान पर आरोप लगा दिया है कि उसने दोनों पक्षों को अलग अलग बिंदु वाले शांति प्रस्ताव पेश किए यानी ईरान की मांगें अमेरिका को सही तरीके से नहीं बताईं और न ईरान तक अमेरिकी मांगें सही सही दीं। यही वजह है कि होर्मुज पर आधिपत्य से लेकर लेबनान के शांति वार्ता में होने या न होने और यूरेनियम के इनरिचमेंट तक लगभग हर मुद्दे पर दोनों अपने अपने रुख पर कायम हैं जो एक दूसरे से ठीक उलट हैं। लेबनान पर तो इजराइल की मार जारी ही है जिसमें हिजबुल्लाह प्रमुख नईम कासिम के भतीजे अली यूसुफ हर्षी को मार भी गिराया गया है। ईरान ने चेतावनी दी थी कि यदि हिजबुल्ला, हमास या हूतियों पर हमले हुए तो वह इसे खुद पर हमलना मानेगा लेकिन इजराइल के लेबनान पर हमले जारी हैं। हालत ये है कि अमेरिका कह रहा है हम ईरान को परमाणु विकल्प नहीं देने वाले और ईरान कह रहा है कि हम तो परमाणु छोड़ने वाले ही नहीं हैं। होर्मुज पर अमेरिका कह रहा है कि वह यातायात ठीक करने की व्यवस्था देखेगा जबकि ईरान कह रहा है कि यहां तो हमारा कब्जा रहेगा। दरअसल ईरान ने ऐसी ऐसी दस शर्तें रखी हैं जो अमेरिका के लिए मानना असंभव सा है वहीं अमेरिका ने ईरान के सामने ऐसी शर्तें रखी हैं जो मान लेने पर यह साफ हो जाएगा कि ईरान ने पूरी तरह सरेंडर कर दिया है। कहा जा रहा है कि पाकिस्तान ने एक दूसरे की शर्तें पहुंचाने के बीच में गड़बड़ कर दी और धोखे से शांति प्रस्ताव पर दोनों को राजी करा दिया। अब ईरान कह रहा है कि पाकिस्तान ने तो हमें यह भी कहा कि अमेरिकी ही नहीं यूएन वाले प्रतिबंध भी हटा दिए जाएंगे ओर बमबारी में हुए नुकसान की भी भरपाई अमेरिका करने को तैयार है जबकि अमेरिका ने ऐसी कोई शर्त भी मानने से साफ इंकार कर दिया है। इस तरह ईरान युद्ध का आंशिक संघर्ष विराम अब खटाई में पड़ता नजर आ रहा है।
