Congress नेताओं ने पैसा खा लिया, टिकट नहीं दिया-गौरव कुमार
पत्नी को विधानसभा के लिए टिकट और महिला कांग्रेस में पद दिलाने के लिए करोड़ों रुपया देने का दावा
हरियाणा महिला कांग्रेस की जनरल सेक्रेटरी ने अपना पद छोड़ने के साथ ही जो खुलासे किए हैं उन्होंने कांग्रेस की कार्यशैली के साथ ही गांधी परिवार को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। इन महिला कांग्रेस सदस्य के पति गौरव कुमार ने साफ शब्दों में कहा है कि उन्होंने अपनी पत्नी को राज्य महिला कांग्रेस अध्यक्ष बनवाने के लिए अलग अलग पदाधिकारियों ही नहीं प्रियंका गांधी और सोनिया गांधी के सचिवों तक को पैसा पहुंचाया है। कुमार का कहना है कि जिन लोगों को उन्होंने पैसा दिया उनमें के सुरेश और केसी वेणुगोपाल तो हैं ही साथ ही उन्होंने दस जनपथ और प्रियंका के सचिव शादाप खान को भी पैसा दिया है और अलग अलग समय में यह राशि सात करोड़ से ज्यादा की है। कुमार का कहना है कि उन्हें अपनी पत्नी के लिए विधानसभा की उम्मीदवारी लेनी थी जिसके लिए अलग से पैसे दिए गए और महिला कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए भी उनके परिवार ने जमकर पैसा दिया, इसके बाद भी उन्हें वादे के मुताबिक टिकट और पद नहीं दिया गया। कुमार का कहना है कि वे बता सकते हैं कि उन्होंने दस जनपथ कब पैसा पहुंचाया और कब प्रियंका गांधी के चिव उनके घर पैसा लेने खुद पहुंचे। कांग्रेस नेत्री और उनके पति का कहना है कि जब जब उनसे पैसा मांगा गया तब तब उन्होंने मांगी गई रकम पहुंचाई और इसके लिए उन्हें लोगों से भी पैसा जुटाना पउ़ा। कुमार कहते हैं कि एक दो बार तो ऐसा भी हुआ कि दो घंटे के अंदर रकम पहुंचाने का आदेश दिया गया और यह सुबह के ऐसे समय था जब बैंक खुली भी नहीं थीं। अब कुमार चाहते हैं कि उन्हें उनका पैसा ही वापस दे दिया जाए लेकिन यह भी मांग न माने जाने पर ही उन्होंने खुलकर यह बात कही है। ऐसे आरोप पहले भी लगते रहे हैं और कई बार ये आरोप लग चुके हैं कि कांग्रेस में पदों और टिकट देने के लिए पैसे की डिमांड की जाती है। वहीं ऐसे किसी लेनदेन से कांग्रेस ने इंकार किया है। कुमार का कहना है कि उन्होंने कई बार कैश दिया है लेकिन कुछ ट्रांजेक्शन ऑनलाइन भी हैं जिनमें पैसे लेने वाले का नाम साफ हो जाता है और यह भी तस्दीक की जा सकती है कि वे जब बता रहे हैं तब दस जनपथ में पैसा पहुंचा या नहीं जबकि कांग्रेस का कहना है कि कुमार और उनकी पत्नी को पद नहीं मिलने पर वे मन से आरोप लगाते जा रहे हैं जबकि इनके पक्ष में कोई तथ्य मौजूद नहीं हैं।
