March 9, 2026
वर्ल्ड

China कर रहा है ईरान की मदद, अमेरिका नाराज

चीन ने अब युद्ध रोकने की अपील की लेकिन छुपे तरीके से दे रहा है ईरान को कई जनकारियां

कुछ समय के लिए ही सही, किसी को जियो पॉलिटिक्स का एक्सपर्ट मानने से साफ इंकार कर दीजिए। टीवी चैनलों पर मौजूद ऐसे जानकारों को कुछ समय सिर्फ मजे के लिए देखिए क्योंकि ट्रंप की अगुवाई में चल रही अमेरिकी सरकार के समय में आप कितने ही एक्सपर्ट बन लें लेकिन समझ कुछ नहीं सकेंगे। बेहतर है ऐसे समय में सिर्फ भारत पर ध्यान केंद्रित किया जाए और ज्यादा ही हो तो यह समझने की कोशिश की जाए कि पाकिस्तान और चीन कहां खड़े हैं। इसलिए अमेरिका और इजराइल के साथ बाकी उन सभी देशों की बात बाद में कर ली जाएगी जिन पर ईरान ने गुस्से में हमला कर डाला और जिसके असर दूर तक जाने वाले हैं। इस खेल में सबसे बुरी हालत में पाकिस्तान आ चुका है जिसने अभी तक तो यही काम किया कि चोर को चोरी करने के लिए उकसाते रहे और सेठ से जागते रहने को कहे। एक तरफ वह सऊदी अरब से कहता है कि यदि हमला तो मानना जाएगा कि यह महला पाकिस्तान पर ही है और लड़ाई में कूदने से वह नहीं हिचकेगा लेकिन जब ईरान खोमैनई की मौत का बदला लेने के लिए सउदी पर भी हमला करता है तो पाकिस्तान की सांसें रुक जाती हैं। उसका एक नुकसान तो यह भी है कि वह मुस्लिम देशों के डिप्टी सरदार होने की कोशिश में भी झटका खा गया है जबकि सरदार होने की तुर्की की कोशिश उलटे मजबूत ही हुई है। एक तरह अफगानिस्तान उसके अंदर तक जाकर जहां तक चीन का सवाल है, उसके लिए ईरान पर हमला लगभग हर कोण से भारी नुकसान का मामला है। पहली बात तो यह कि उसका ईरान से चोरी छुपे लिया जा रहा तेल वाला खेल समाने आ गया है और जिस तरह वह डॉलर को दरकिनार कर बार्टर या अपनी करेंसी को लेकर एक सिस्टम बनाना चाह रहा था वह ध्वस्त हो गया है। इससे भी ज्यादा नुकसान इस बात का हुआ है कि चीन के हथियारों और सुरक्षा उपकरणों को लेकर भरोसा पूरी तरह खत्म हो गया है। अब तक तो चीन ने अपने सुरक्षा उपकरणों को लेकर यह भरोसा देना जारी रखा था कि ये बाकी सामानों की तरह नहीं हैं बल्कि एकदम आधुनिक हैं। पहले ऑपरेशन सिंदूर के समय पाकिस्तान में चीन के सुरक्षा उपकरणों का बुरी तरह फेल होना और अब ईरान में इस तरह पिट जाना इस बात की गारंटी है कि मजबूरी में भी जो बाजार चीन से ऐसे सामान ले रहे थे वो बाजार भी अब चीन के लिए खत्म हैं। यानी चीन की अर्थव्यवस्था का संभल पाना फिलहाल तो मुश्किल ही लग रहा है क्योंकि उसके सामान्य सामानों का बाजार पहले ही बेतरह बिगड़ा हुआ है, क्रूड को लेकर उसकी रणनीति पूरी तरह ध्वस्त हो रही है और सैन्य बाजार में उसकी धुलाई हो चुकी है। क्रूड को लेकर जिस तरह चीन ने चालाकियां कीं उसने उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि को भी खराब से और ज्यादा खराब की ही श्रेणी में धकेला है। अब यह भी साफ हो गया है कि ईरान को लोकेशन और हमलों में लगने वाली मदद काफी हद तक चीन से मिल रही है इसलिए अमेरिका की नजरें चीन पर तिरछी होना स्वाभाविक ही है। ऐसे में हम इस बात पर जरुर ध्यान दे सकते हैं कि चीन के लिए होने वाले नुकसानों में हमारे लिए फायदे के रास्ते कहां से खुल सकते हैं।