March 10, 2026
वर्ल्ड

Iran में जंग के फैसले ले कौन रहा है

तीन सदस्यों वाली टीम में आपस में फूट, सैन्य निर्णय भी सवालों के घेरे में

ईरान और अमेरिका-इजराइल गठबंधन के बीच जारी जंग में अब यह सवाल उठ रहा है कि आखिर ईरानी हमले किसके कहने पर किए जा रहे हैं और क्या सत्ता के अलग अलग केंद्र बन चुके हैं जिनमें संघर्ष की स्थिति खड़ी हो गई है। ईरान में दो अलग अलग संगठन हैं जो सैन्य काम संभालते रहे हैं और जो हालात सामने आ रहे हैं उससे लग तो यही रहा है कि इन दोनों में कोई तालमेल नहीं है। यही वजह है कि जब पड़ोसी देशों पर मिसाइलें मारने को लेकर माफी मांग ली गई तब भी इन देशों पर हमले जारी हैं। पूछा यही जा रहा है कि अब वह कौन सी निर्णायक शक्ति है जो युद्ध के बड़े फैसले ले रही है। ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियन ने पड़ोस के देशों पर हुए ईरानी हमलों के पर माफी मांगते हुए कहा था कि ईरानी सेना तभी किसी पड़ोसी देश पर हमला करेगी जब उसकी जमीन से ईरान पर हमला हो। आईआरजीसी और कई धार्मिक नेताओं ने राष्ट्रपति के बयानों का विरोध करते हुए खोमैनीई वाली क्रांति की सुरक्षा की गारंटी मांगी है। वहीं सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव लारिजानी का कहना है कि दुश्मन इस इलाके में मौजूद बेस से हम पर हमला करेगा तो हम निश्चित जवाब देंगे। न्यायपालिका के मौजूदा का भी कहना है कि अमेरिकी हमलों में सहयोगी देशों पर हमले जारी रखे जाने चाहिए। राष्ट्रपति पर इन सब ने इतना दबाव बनाया कि उन्हें अपना बयान वापस लेना पड़ा। ईरान के संविधान से फिलहाल तीन सदस्यीय अंतरिम नेतृत्व परिषद बनी है। जिसमें राष्ट्रपति, न्यायपालिका प्रमुख एजेई और धार्मिक विद्वान अलीरेजा अराफी रखे गए हैं। यह परिषद नए सुप्रीम लीडर चुने जाने तक निर्णय लेने के लिए जिम्मेदार है लेकिन इसके तीनों सदस्यों के बीच अहम और निर्णयों को लेकर टकराव सामने आने लगे हैं। माना तो यही जा रहा है कि युद्ध के फैसले अलग अलग संस्थाओं और सैन्य प्रमुख खुद ही लिए जा रहे हैं और इन तीनों का कोई संयुक्त आदेश बन ही नहीं पा रहा है।