Big Change किन्नर समुदाय में बदल रहीं मान्यताएं
किन्नर समाज में धार्मिक बदलाव: सलाम से राम-राम तक
भारत में किन्नर समाज हमेशा से अपनी विशिष्ट पहचान और परंपराओं के लिए जाना जाता रहा है। लेकिन बीते कुछ वर्षों में इस समाज में एक बड़ा धार्मिक और सामाजिक परिवर्तन देखने को मिला है। जहां पहले किन्नर समाज की गद्दियां और परंपराएं इस्लामिक रंग में रंगी हुई थीं, वहीं अब धीरे-धीरे सनातन धर्म की ओर झुकाव बढ़ता जा रहा है। महाकुंभ-2025 के बाद यह बदलाव और तेज हुआ है। किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर कल्याणीनंद गिरि का दावा है कि अब तक लगभग 10 हजार किन्नर इस्लाम की परंपराएं त्यागकर हिंदू धर्म अपना चुके हैं। उनके अनुसार, पहले किन्नर सम्मेलनों और पंचायतों में ‘सलाम’ का अभिवादन होता था, लेकिन अब ‘राम-राम’ का बोलबाला है।
घर वापसी की प्रक्रिया
महामंडलेश्वर ने बताया कि आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी के नेतृत्व में महाकुंभ के बाद देशभर में किन्नरों की घर वापसी कराई गई। वे किन्नर जो खुद को अल्पसंख्यक मानने लगे थे, अब सनातन धर्म की परंपराओं से जुड़ रहे हैं। गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा, झारखंड, बिहार, केरल, राजस्थान और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में किन्नर समाज के लोग हिंदू धर्म अपनाने लगे हैं।
कल्याणीनंद गिरि ने अपने जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रयागराज के कटरा क्षेत्र में एक हिंदू परिवार में जन्म लेने के बावजूद रोजी-रोटी के लिए दिल्ली जाने पर उन्हें मुस्लिम परंपराएं माननी पड़ीं। लेकिन वर्ष 2020 में हरिद्वार कुंभ के दौरान लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी से मुलाकात के बाद उन्हें किन्नर अखाड़े से जुड़ने का अवसर मिला। इसके बाद उन्होंने धर्म, शिक्षा, संस्कृति और समाज को एकजुट रखने का संकल्प लिया।
बदलती परंपराएं और आस्था
महामंडलेश्वर ने कहा कि पहले अल्पसंख्यक किन्नर बधाई देने तक से परहेज करते थे, लेकिन अब वे छठ पूजा जैसी हिंदू परंपराओं का पालन कर रहे हैं। कई किन्नर अब रुद्राक्ष की माला धारण कर रहे हैं, तिलक लगाकर सनातन सम्मेलनों में भाग ले रहे हैं। वैष्णो देवी दर्शन के दौरान भी अनेक किन्नरों ने उनसे संपर्क कर माघ मेले में आने और हिंदू धर्म अपनाने की इच्छा जताई।
यह बदलाव केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक पहचान और सम्मान से भी जुड़ा है। किन्नर समाज अब अपनी परंपराओं को नए रूप में प्रस्तुत कर रहा है और सनातन मूल्यों को अपनाकर समाज में अपनी जगह मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
सामाजिक चुनौतियां
कल्याणीनंद गिरि ने किन्नर समाज के साथ होने वाले सामाजिक और शारीरिक शोषण की भी बात उठाई। उन्होंने कहा कि अक्सर किन्नरों को शादी का झांसा देकर ठगा जाता है। ईश्वर ने किन्नर समाज को शृंगार और नृत्य की कला का आशीर्वाद दिया है, जिससे वे अपनी आजीविका चलाते हैं। लेकिन समाज में उन्हें सम्मानजनक स्थान नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि देश में दूसरे समुदायों की तुलना में किन्नरों की संख्या अधिक है, लेकिन उन्हें बराबरी का दर्जा नहीं दिया जाता। यही कारण है कि किन्नर अखाड़ा लगातार प्रयास कर रहा है कि आने वाली पीढ़ियों को सनातन मूल्यों की रक्षा के साथ-साथ सम्मानजनक पहचान भी मिले। किन्नर समाज में हो रहा यह धार्मिक परिवर्तन केवल आस्था का मामला नहीं है, बल्कि यह उनकी सामाजिक स्थिति और पहचान से भी जुड़ा है। सलाम से राम-राम तक का सफर इस बात का प्रतीक है कि किन्नर समाज अब अपनी जड़ों की ओर लौट रहा है और सनातन धर्म को अपनाकर समाज में नई जगह बनाने की कोशिश कर रहा है। महाकुंभ के बाद शुरू हुई यह प्रक्रिया अब देशभर में फैल रही है। रुद्राक्ष की माला, तिलक और हिंदू परंपराओं का पालन करते किन्नर समाज का यह नया रूप भारतीय समाज में एक महत्वपूर्ण बदलाव की ओर इशारा करता है। यह बदलाव न केवल धार्मिक दृष्टि से अहम है, बल्कि सामाजिक समानता और सम्मान की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।
