August 29, 2025
लाइफस्टाइल

Artificial Intelligence ने अपनी भाषा बना ली तो क्या होगा

अभी तो चैटबॉट इंसान को समझ आने वाली भाषा में काम कर रहे हैं लेकिन भविष्य में वे अपनी भाषा गढ़ सकते हैं

एआई को लेकर एक चेतावनी लगातार सामने आ रही है कि यह आने वाले समय में आपस में ऐसी भाषा भी गढ़ सकते हैं जो आम इंसान तो छोड़िए इन चैटबॉट को बनाने वाले भी न समझ सकें. मौजूदा हालात में चैटबॉट अंग्रेजी में चेन ऑस्टेंट सोचते हैं तो हम समझ सकते हैं कि इनका ‘दिमाग’ कैसे चल रहा है लेकिन यदि इंसानों की समझ से इतर कोई भाषा इन्होंने अपनी आपसी बातचीत के लिए बना ली तो वाकई मुश्किल होगा इनकी विचार प्रक्रिया को समझ पाना. 2024 के नोबेल पुरस्कार विजेता हिंटन भी इसे लेकर हिंट दे चुके हैं. यह तब है जब कैलिफोर्निया में ओपनएआई और इसकी कंपनी के मुखिया सैमऑल्टमैन को इस बात के लिए केस का सामना करना पड़ रहा है कि चेटबॉट ने इस युवा को आत्महत्या के लिए उकसाया और हर तरह से सुसाइड में मदद की.

इसे लेकर तीसरी चिंता इस बात की है कि क्या वाकई अगले पांच साल में एआई दो करोड़ नौकरियों को खत्म करने चल पड़ा है. एक अन्य चिंता जो एआई के आने से है वह इस बात की है कि मानव सृजनशीलता को यह सबसे पहले निगलना चाहेगा. ऐसे में अगर एआई में चेतना आ गई है तो हालात क्या होंगे कहना मुश्किल है. कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने सोचने की अपनी प्रणाली बना ली तो इंसान इसे कैसे नियंत्रित करेगा यह भी समझ पाना मुश्किल है. दरअसल कंप्यूटर के अन्दर ही कंप्यूटर एप्लीकेशन पर काम करने वाले डिजिटल रोबोट्स इंटरनेटऔर सोशल मीडिया पर काफी सारे हैं जो मनुष्य की तरह बातें करने में भी सक्षम हैं. इनके मालिक इनका इस्तेमाल किस्सो झूठ या तथ्य को सोशल मीडिया पर स्थापित करने के लिए करते हैं. एक तरफ कुत्रिम बुद्धि का इस्तेमाल इन झूठ (फेक न्यूज) को पकड़ने में और दूसरी तरफ इन्हें गढ़ने के ए जोर-शोर से हो रहा है. बहुत हद तक आईक्यू आधारित काम में भी इसका समावेश बढ़ रहा है लेकिन अभी भी मानवीय गुण बहुत बुनियादी है और एआइ जैसी तकनीकें इसका मुकाबला नहीं कर सकती हैं. ओपन एआई के सैम ऑल्टमैन ने भी दावा कर ही दिया है कि उनके चैटबॉट का नया मॉडल इतना प्रभावी है कि वे खुद इससे चकित रहते हैं.