Delhi Blast से संबंधित अल फलाह यूनिवर्सिटी तोड़ी जाएगी
अब इस ‘कथित’ यूनिवर्सिटी में कोई काम नियम से नहीं पाया गया
फरीदाबाद स्थित अलफलाह विश्वविद्यालय इन दिनों सुरक्षा एजेंसियों की गंभीर जांच के घेरे में है। अब इस पर बुलडोजर कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है क्योंकि इस संस्थान का कोई भी काम नियम से होता हुआ नहीं पाया गया है, यहां तक कि इस कथित यूनिवर्सिटी की पहचान से लेकर इसके चेयरमेन की नियुक्ति तक सारी व्यवस्था में जमकर गड़बड़ियां मिली हैं। जांच में सामने आया है कि कई आतंकी मॉड्यूल, विशेष रूप से डॉक्टर मॉड्यूल, की गतिविधियों के सूत्र इसी यूनिवर्सिटी से जुड़े हुए हैं। एजेंसियों को देश-विदेश में फैले नेटवर्क के लिंक मिले हैं, जिनमें जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, हरियाणा, गुजरात से लेकर ढाका, अंकारा, अफगानिस्तान और दुबई तक की कड़ियाँ शामिल हैं। यूनिवर्सिटी को लेकर दो नोटिस जारी किए गए हैं और प्रशासन से एफआईआर में दर्ज आरोपों पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि कैंपस की कुल जमीन कितनी है और क्या इसकी कभी सही नपती हुई भी है। 1996 में अलफलाह ट्रस्ट बनाया गया था, 1997 में इंजीनियरिंग कॉलेज बना और 2014 में इसे यूनिवर्सिटी का नाम दे दिया गया। अब आरोप हैं कि 65 से 70 एकड़ जमीन में कई अनियमितताएँ छिपाई गईं और किसानों की पारंपरिक पगडंडियों को बंद कर दिया गया।
निर्माण मानकों को लेकर भी गंभीर शंकाएं उठी हैं। जांच एजेंसियों ने सवाल उठाया है कि क्या सभी इमारतें स्वीकृत नक्शे के अनुसार बनी हैं? क्या लेबोरेटरी सुरक्षा मानकों पर खरी उतरती हैं? क्या परिसर में ऐसी संरचनाएं मौजूद हैं जिनका इस्तेमाल सेफ हाउस की तरह किया जा सकता है? साथ ही यह भी आशंका है कि कहीं उर्वरक जैसे केमिकल का दुरुपयोग कर खतरनाक सामग्री तैयार करने की कोशिश तो नहीं हुई। सबसे गंभीर आरोप यह है कि यूनिवर्सिटी परिसर से कई संदिग्ध डॉक्टरों का नेटवर्क सक्रिय था। डॉ। मुजम्मिल, डॉ। उमर समेत 15 से अधिक डॉक्टर फिलहाल लापता बताए जा रहे हैं। एजेंसियों का मानना है कि कुछ लोगों को कट्टरपंथ की दिशा में धकेलने की कोशिश की गई। हालांकि छात्रों की एक बड़ी संख्या इन गतिविधियों से अछूती रही, लेकिन कैंपस का उपयोग संदिग्ध गतिविधियों के लिए होने की आशंका ने मामले को संवेदनशील बना दिया है। फिलहाल, यूनिवर्सिटी की पूरी मैपिंग, जमीन का मुआयना और निर्माण की जांच शुरू हो चुकी है। यदि अनियमितताएँ साबित होती हैं, तो बुलडोजर एक्शन की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा। यह कार्रवाई आतंकी नेटवर्क पर बड़ा प्रहार मानी जाएगी, क्योंकि कई हॉटस्पॉट्स का सिरा इसी संस्थान से जुड़ता दिख रहा है।
दिल्ली में 10 नवंबर को हुए कार ब्लास्ट ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। इस हमले में मृतकों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है, कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं। अब इस मामले की जांच कर रही एनआईए ने एक और बड़ा खुलासा किया है। एजेंसी ने सोमवार को आतंकवादी उमर उन नबी के एक और प्रमुख सहयोगी जासिर बिलाल वानी उर्फ दानिश को श्रीनगर गिरफ्तार कर लिया। दानिश कश्मीर के अनंतनाग जिले के काजीगुंड इलाके का रहने वाला है और साजिश में उसकी भूमिका बेहद तकनीकी व खतरनाक बताई जा रही है। एनआईए की शुरुआती जांच बताती है कि दानिश लगातार आत्मघाती हमलावर उमर उन नबी के संपर्क में था और धमाके से पहले उसकी तकनीकी तैयारियों में गहराई से शामिल था।
