February 11, 2026
इंदौर

Indore का अहिल्या पुस्तकालय हो रहा राजनीति का शिकार

सेवानिवृत्ति के बाद भी ‘सुपर बॉस’ चला रहे अहिल्या पुस्तकालय
इंदौर के अहिल्या पुस्तकालय में एक अलग ही माहौल देखा ज रहा है कि कोई व्यक्ति रिटायर होकर भी खुद को सुपर बॉस समझ कर काम कर रहा हो और जो उसके हिसाब से न चले उसके खिलाफ अभियान चलाकर उसे हटवा दिया जाए। पिछले दिनों प्रभारी क्षेत्रीय ग्रंथपाल को जिस तरह से हटाया गया उसके पीछे की कहानी तो यही सामने आ रही है कि मीडिया के कुछ मित्रों को साध कर पूर्व क्षेत्रीय ग्रंथपाल रहे जीडी अग्रवाल ने लिली डावर को एक सुनियोजित निष्कासन दिलवाया है। मजे की बात यह है कि अग्रवाल 2015 में सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन आज भी अहिल्या पुस्तकालय को अपनी जागीर समझते हैं। सरकारी रिकॉर्ड भले कहता हो कि अग्रवाल सेवानिवृत्त हैं, लेकिन व्यवहार में वे आज भी नियुक्ति तय करते हैं, हटवाते हैं, और माहौल बनवाते हैं। 2015 से 2021 तक नौ प्रभारी क्षेत्रीय ग्रंथपाल बदले लेकिन सभी में अग्रवाल का हस्तक्षेप रहा चाहे वह प्रत्यक्ष हो या परोक्ष। अग्रवाल का सीधा सा हिसाब है कि जो मेरे हिसाब से चलेगा, वही टिकेगा। यहां तक कि अग्रवाल की दखलंदाजी के चलते कुछ ने तो खुद ही इ जगह रहने से इंकार कर कर दिया और तबादला करा लिया। जब 2021 में लिली डावर ने पद संभाल तो उनके साथ भी यही समस्या आई कि उनसे ‘समायोजन’ से लेकर व्यक्तिगत लाभ तक के दबाव मानने की अपेक्षा थी और जब उन्होंने इससे इंकार कर दिया तो उनके खिलाफ माहौल बनाया जाने लगा। अहिल्या पुस्तकालय में ईमानदारी और लाइब्रेरी को बेहतर करने जैसी योग्यताएं भले किसी में न हों लेकिन यदि वह अग्रवालजी की गुडबुक में है तो उसके लिए रास्ते आसान हैं वरना तो काम करना मुश्किल ही है। दो वर्षों तक जमीन तैयार जमीन पर अंततः लिली डावर को प्रभारी क्षेत्रीय ग्रंथपाल पद से हटा दिया गया। डावर ने खजराना स्कूल में अपनी सेवाएं शुरु कीं तो उनकी जगह वर्तमान क्षेत्रीय ग्रंथपाल बतौर हर्षिता डेविड आ गईं और अब बताया जा रहा है कि अग्रवाल को उनसे भी समस्याएं हो रही हैं। शहर के बीच में मौजूद और करोड़ों के खर्च से चल रहे अहिल्या पुस्तकालय और उससे जुड़े प्रीतमलल दुआ वीथिका)में समस्या समस्याओं की जड़ में राजनीति ही ज्यादा है जिसमें सेवानिवृत्ति के बाद भी कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं हो रहे अग्रवाल का हाथ साफ साफ नजर आता है।