April 9, 2026
प्रदेश

Indore Nagar Niagm बैठक में ‘वंदे मातरम’ न बोलने की जिद पर अड़ीं कांग्रेस पार्षद

बाप में दम हो तो कहलवा लो वंदे मातरम- इंदौर की कांग्रेस पार्षद रुबीना बोलीं
इंदौर नगर निगम में बात तो बजट की चल रही थी लेकिन इस बीच मामला यह उठा कि कुछ सदस्य जानबूझकर देरी से आए ताकि उन्हें वंदे मातरम न बोलना पड़े। बात बढ़ी तो कांग्रेस की दो सांसद रुबीना इकबाल और फौजिया शेख अलीम ने साफ कहा कि वो वंदे मातरम नहीं कहेंगी। रुबीना इकबाल खान ने तो अपनी ही पार्टी के लिए इसी लय में यह तक कह दिया कि भाड़ में जाए कांग्रेस पार्टी। इसके बाद हंगामे के हालत बन गए और भाजपा पार्षदों ने नारे लगाते हुए इन दोनों का जमकर विरोध किया। इस मामले ने तूल पकड़ लिया है लेकिन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी इस पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं क्योंकि विवाद में शामिल फौजिया के पति उनके अच्छे मित्र और पुराने साथी भी हैं। वंदे मातरम न बोलने की जिद को लेकर पार्षदों को सुप्रीम कोर्ट तक के निर्णय के बारे में बताया गया लेकिन दोनों अपनी जिद पर अड़ी रहीं और रुबीना इकबाल खान ने तो अपनी ही पार्टी की भी जमकर लू उतारने के साथ कांग्रेस को भाड़ में जाने की सलाह दे डाली। इतने हंगाम के बाद कांग्रेस के शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे जरुर सक्रिय हुए और उन्होंने रुबीना को पार्टी से निकालने की बात कहने के साथ ही यह भी कहा कि इंदौर कांग्रेस कार्यालय में होने वाले हर कार्यक्रम में अब वंदे मातरम अनिवार्य होगा और यह सभी को गाना होगा। चिंटू चौकसे के इस निर्णय को लेकर कांग्रेस में दो फाड़ नजर आ रही हैं। चौकसे का कहना है कि जो लोग वंदे मातरम नहीं बोल सकते हमें उन लोगों की जरुरत नहीं है और उनकी तो कतई जरुरत नहीं है जो पार्टी को ही भला बुरा कहने से बाज नहीं आते हों। ठीक यही बात प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केके मिश्रा ने भी कही है लेकिन दूसरा खेमा वह भी है जो कह रहा है कि इस मामले को इतना तूल नहीं देना चाहिए और बात को रफा दफा कर देना चाहिए क्योंकि कई ऐसे सदस्य निकल आएंगे जो वंदे मातरम बोलने में दिक्कत महसूस करते हैं। हालांकि यह पक्ष रखने वाले नेता यह नहीं बता पा रहे हैं कि वंदे मातरम बोलने में किसी को क्या और क्यों दिक्कत हो सकती है।