Indore में दूषित पानी से मरने वालों की संख्या आठ
महापौरजी आप तो ऐसे न थे
आदित्य पांडे
जब आप महापौर बने तो माना जा रहा था कि शहर को एक जहीन और पढ़ा लिखा सा ऐसा नेतृत्व मिला है जो कानूनी दांवपेंच इतना समझता है कि अफसर उसे ‘चला’ तो नहीं सकेंगे। फिर धीरे धीरे यह समझ ने लगा कि आप उन सब से कुछ ज्यादा अलग नहीं हैं बल्कि कुछ के तो करीबी होने के लिए आपने ‘गुट निरपेक्ष’ होने की अपनी छवि भी तोड़ दी। ढीलेपन और सुस्ती का वही पुराना रवैया नजर आने लगा जो कभी उमाशशि शर्माऔर फिर कृष्णमुरारी मोघे के समय हुआ करता था। मोघे जी के बारे में कम से कम यह तो सभी को पता था कि वे दिन में किसी की नहीं सुनेंगे क्योंकि वे आराम फरमाते हैं लेकिन आप तो जागते हुए भी 15 दिनों से आ रही पानी की शिकायतों पर ध्यान नहीं दे सके। जो पार्टी मना रहे थे, जो सुरुर में थे और जो गुरुर में थे उनसे तो जनता को कभी शिकायत नहीं है क्योंकि उनसे उम्मीदें ही खत्म कर ली हैं हमने लेकिन आपने जो उम्मीदें जगाई थीं उनका क्या। आज मुझे लगता है कि आपके बेटे ने जो भाषण दिया था वह सही था और जिस तरह उसने नेताओं पर टिप्पणियां की थीं वो भी कम से कम गलत तो नहीं थीं। अब वह ‘भूषण’ की शागिर्दी में जा पहुंचा है तो हो सकता है कि वही किसी दिन आपकी इस कुंभकरणी नींद के खिलाफ नारे लगाते भी नजर आ जाए। नर्मदा को इतनी बड़ी कीमत पर इंदौर लाकर लोगों से जमकर पैसा वसूलने तक के बीच में गंदा पानी क्यों और कैसे मिल जाता है इसका जवाब शायद वह आपसे मांगे। जिन्हें पता न हो उन्हें यह भी पता होना चाहिए कि लगभग 70 किलोमीटर दूर से नर्मदा को इंदौर पहुंचाने की सालाना कीमत करोड़ों में होती है और इस परियोजना के अफसरों की चांदी देखते ही बनती है। बाकी निगम के मजे तो आप जानते ही हैं और इसमें चल रही नेतागिरी भी किसी से छुपी नहीं है। ऐसे में आपके आने पर यह मानना गया था कि शिकायतें सुनी जाएंगी, कार्रवाई होंगी और जुगाउ़ से मिल रहे सबसे साफ शहर के खिताब को वाकई आप इस लायक बना देंगे लेकिन अब लगता है कि हम यदि चुल्लू भर पानी लेकर उसमें डूब मरने की कोशिश भी करें तो उसमें भी कहीं न कहीं ड्रेन का पानी मिला होगा। मरने वालों का आंकड़ा भले आठ हो और आपको यह बड़ा न लगता हो लेकिन सच यह है कि अब तक न जाने कितनी ऐसी गुमनाम मौतें हो चुकी होंगी जो सामने ही नहीं आ सकी हैं। यह मामला भी तो पिछले एक हफ्ते से आप दबा ही रहे हैं। बीमारों की संख्या सैकड़ों में और मरने वालों की संख्या दहाई तक पहुंचने पर भी आप, आपके साथी और इस सबके जिम्मेदार यदि पार्टी कर रहे थे तो वाकई हमें एक चुल्लू ऐसे पानी की जरुरत है जिसमें ड्रेनेज का पानी न मिला हो ताकि मरते हुए शुद्ध नर्मदा जल में हमारा तर्पण तो हो सके।

इंदौर नगर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से फैली बीमारी ने गंभीर रूप ले लिया है। अब तक आठ लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं। उल्टी‑दस्त और डायरिया जैसी शिकायतों ने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया है। पेयजल लाइनों की जांच में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। भागीरथपुरा पुलिस चौकी में बने शौचालय के नीचे सेप्टिक टैंक नहीं था और वहां से निकलने वाला गंदा पानी सीधे पेयजल पाइप लाइन में मिल रहा था। यही कारण है कि जल जनित बीमारियों के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी। प्रशासन ने शौचालय को ढहाकर पाइप लाइन की मरम्मत शुरू कर दी है।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, महापौर और विधायक मौके पर पहुंचे और मरीजों से मुलाकात की। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने, जो इंदौर के प्रभारी मंत्री भी हैं, स्वास्थ्य विभाग को बेहतर इलाज और त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मृतकों के परिजनों को दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा भी की गई है। इस बीच कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी भी पीड़ितों व मृतकों के परिजनों से मिलने पहुंचे। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वे लंबे समय से नलों में बदबूदार पानी आने की शिकायत कर रहे थे, लेकिन निगम अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। जब मौतें होने लगीं और अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ी, तब प्रशासन हरकत में आया। 26 से 30 दिसंबर के बीच गोमती रावत, उर्मिला यादव, सीमा प्रजापति, उमा कोरी, नंदलाल पाल, मंजुला दिगम्बर और तारा रानी की मौत हुई। इनमें से चार मौतें मंगलवार को हुईं। परिजनों का कहना है कि सभी मरीज उल्टी‑दस्त से पीड़ित थे। हालांकि स्वास्थ्य विभाग मौतों को सीधे डायरिया से नहीं जोड़ रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम घर‑घर जाकर दवाएं बांट रही है और मरीजों की जांच कर रही है। नगर निगम ने ड्रेनेज लाइन की सफाई शुरू कर दी है और टैंकरों से पानी सप्लाई की जा रही है। प्रभावित क्षेत्र की सभी पाइप लाइनों की जांच की जा रही है और लीकेज वाले हिस्सों को दुरुस्त किया जा रहा है। नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव ने पीएचई अधिकारियों के साथ बैठक कर प्रभावित क्षेत्र की वाटर सप्लाई व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि पाइप लाइनों को बदलने का टेंडर जारी हो चुका है और जल्द ही काम शुरू होगा। साथ ही पानी संबंधी शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए अलग नंबर जारी करने की घोषणा भी की गई है। कांग्रेस ने भी इस घटना को लेकर प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा है कि वह इस मामले में एफआईआर कराएगी। इस हादसे ने इंदौर की स्वच्छता छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह हादसा क्यों हुआ?
भागीरथपुरा क्षेत्र में पेयजल पाइप लाइन के पास बने पुलिस चौकी के शौचालय में सेप्टिक टैंक नहीं था। वहां से निकलने वाला गंदा पानी सीधे मेन पाइप लाइन में मिल रहा था। 1997 में डाली गई इस लाइन में लीकेज था, जिसके कारण गंदा पानी पेयजल में घुल गया। यही दूषित पानी पूरे क्षेत्र में सप्लाई हुआ और लोगों में उल्टी‑दस्त जैसी बीमारियां फैल गईं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वे लंबे समय से नलों में बदबूदार पानी आने की शिकायत कर रहे थे, लेकिन निगम अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। जब मौतें होने लगीं और मरीजों की संख्या बढ़ी, तब प्रशासन हरकत में आया। नगर निगम ने अब शौचालय को ढहा दिया है और पाइप लाइन की मरम्मत शुरू कर दी है। प्रभावित क्षेत्र की सभी पाइप लाइनों को बदलने का निर्णय लिया गया है। साथ ही पानी संबंधी शिकायतों के लिए अलग नंबर जारी करने की तैयारी है।
मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान, जिम्मेदारों पर कार्रवाई, समिति भी गठित
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर में हुई घटना पर दुख जताते हुए कहा है कि इस घटना के लिए जिम्मेदारी तय करने के लिए समिति का गठन किया गया है वहीं जोन क्रमांक 4 के जोनल अधिकारी, सहायक यंत्री को तत्काल निलंबित कर दिया है व उपयंत्री को सेवा से पृथक कर दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उपचार रत प्रभावितों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है। साथ ही उन्होंने इस दुखद हादसे में क्षेत्र का दायित्व संभालने वाले अधिकारियों पर कार्यवाही के निर्देश दिए है। इस संबंध में कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि भागीरथपुरा मामले में जोनल अधिकारी शालिग्राम सितोले, सहायक यंत्री योगेश जोशी को निलंबित और प्रभारी उपयंत्री शुभम श्रीवास्तव को सेवा से पृथक कर दिया गया है. इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यों की एक समिति गठित की गई है। समिति आईएएस नवजीवन पंवार के निर्देशन में जांच करेगी। समिति में प्रदीप निगम, सुप्रिडेंट इंजीनियर और मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शैलेश राय को भी शामिल किया गया है।
