February 14, 2026
भोपाल

एमसीयू में विश्व रेडियो दिवस पर सामुदायिक रेडियो ‘रेडियो कर्मवीर’ का री-लॉन्च

आसपास के 52 गांवों तक गूंजेगी आवाज़

विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (एमसीयू) में विश्वविद्यालय के प्रकल्प सामुदायिक रेडियो ‘रेडियो कर्मवीर’ का भव्य री-लॉन्च समारोह उत्साह और गरिमा के साथ संपन्न हुआ। रेडियो कर्मवीर विद्यार्थियों द्वारा, समुदाय के लिए और समुदायिक हित में संचालित किया जाता है, जो पं. माखनलाल चतुर्वेदी के ऐतिहासिक ‘कर्मवीर’ नाम की परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। स्वामी विवेकानंद जी के आदमकद चित्र के समक्ष आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों और विद्यार्थियों द्वारा दीप प्रज्वलन से हुई। इस समारोह में ख़ास तौर से प्रसिद्ध चिंतक-विचारक एवं सिद्ध पीठ श्री हनुमत निवास, अयोध्या के पीठाधीश्वर आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण महाराज की गरिमामय उपस्थिति रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने की। अपने संबोधन में कुलगुरु ने आचार्य की उपस्थिति को विश्वविद्यालय के लिए सौभाग्य बताया और रेडियो कर्मवीर टीम के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने बताया कि भविष्य में प्रसारण आठ घंटे करने का प्रयास होगा तथा इसका विस्तार 52 गांवों से ज्यादा तक सुनिश्चित किया जाएगा। आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण जी ने ‘शब्द’ को आकाश का गुण बताते हुए कहा कि ध्वनि माध्यम व्यक्ति को व्यापक और निष्पक्ष विस्तार देता है। उन्होंने कहा कि रेडियो का स्वरूप ऐसा है, जो सीमाओं से परे जाकर समाज के हर वर्ग तक पहुंचता है। विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित आकाशवाणी के सुप्रसिद्ध उद्घोषक कमल शर्मा ने रेडियो कर्मवीर की आवाज को हवाओं में गूंजते रहने की शुभकामनाएं दीं। वरिष्ठ रेडियो पत्रकार शैफाली चतुर्वेदी ने कहा कि यह रेडियो भारत की श्रुति परंपरा का हिस्सा बन चुका है और 52 गांवों के लिए उनकी सांस्कृतिक पहचान जैसा बन गया है। वहीं रेडियो जॉकी अनादि की प्रेरक उपस्थिति ने विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाया। रेडियो कर्मवीर के निदेशक डॉ आशीष जोशी ने इसे विद्यार्थियों और शिक्षकों की सामूहिक मेहनत का परिणाम बताया। कुलसचिव प्रो. पी. शशिकला ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। री-लॉन्च के साथ सभी अतिथियों और विद्यार्थियों ने एक साथ कार्यक्रम सुनकर रेडियो के नए तेवर और कलेवर का अनुभव किया। यह पहल न केवल विद्यार्थियों की रचनात्मकता को मंच दे रही है, बल्कि समुदाय और विश्वविद्यालय के बीच संवाद का सशक्त सेतु भी बन रही है।कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के सभी विभागाध्यक्ष, शिक्षक, अधिकारी , कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहें ।