Iberia के घूमने से बदल रहा अफ्रीका और यूरोप का नक्शा
यूरोप और अफ्रीका अपनी जगह से धीरे धीरे खिसक रहे
यूरोप और अफ्रीका के बीच इबेरियन को महाद्वीपीय प्लेटें एक-दूसरे से टकराने वाली जगह माना जाता है। अब वैज्ञानिकों का कहना है कि इबेरिया का कुछ हिस्सा बेहद धीमी गति से घूम रहा है भले इस गति का सतह पर महसूस करना संभव न हो लेकिन यह गति वास्तविक है।
भूकंपीय आंकड़े भी कह रहे हैं इबेरियन प्रायद्वीप के कुछ हिस्से अपनी स्थिति बदल रहे हैं जिसके चलते अफ्रीका और यूरोप की जगहों में भी बदलाव तय है। वैसे यह कोई अचानक आया बदलाव नहीं है, बल्कि लाखों वर्षों से चल रही प्रक्रिया ही है लेकिन इसका धीमा असर जरुर सामने आ रहा है। इबेरियन क्षेत्र भूगर्भीय दबावों का केंद्र है। अफ्रीकी प्लेट और यूरोपीय प्लेट के बीच की खींचतान के चलते यहां कई बार भूकंप आता है और इन्हीं टकराहटों से पिरेनीज और सिएरा नेवादा जैसी पर्वत श्रृंखलाएं भी बनी हैं। अब वैज्ञानिकों का कहना है कि इबेरिया भी इसी क्रम में घूमते नजर आ रहा है। धरती की प्लेटों की हलचल सीधे भूकंप, ज्वालामुखी और समुद्री तूफान जैसी घटनाओं से जुड़ी होती हैं। ऐसे में इबेरिया के घूमने का असर भूमध्यसागर और अटलांटिक क्षेत्र की भूगर्भीय स्थिरता पर पड़ता है। यह प्रक्रिया लाखों वर्षों से जारी है और आगे भी जारी रहेगी और सीधे इसे समझना भी मुश्किल है लेकिन भूगर्भीय समय-सीमा में यह बेहद महत्वपूर्ण तथ्य है। सतह पर चाहे हमें सब कुछ स्थिर दिखे लेकिन धरती के भीतर तनाव और दबाव अपना असर छोउ़ ही रहे हैं।
