April 2, 2026
वर्ल्ड

UN ने शेख हसीना को फांसी की सजा पर जताई आपत्ति

यूएन के महासचिव एंटोनियो गुटारेज ने निष्पक्ष न्याय प्रक्रिया की जरुरत बताई

संयुक्त राष्ट्र ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को फांसी की सजा सुनाए जाने पर गहरी चिंता जताई है। बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण द्वारा विभिन्न आरोपों में यह सजा सुनाई गई, जो 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा से जुड़ी बताई जा रही है। शेख हसीना फिलहाल भारत में निर्वासन में हैं और यह फैसला हसीना की गैर मौजूदगी में सुनाया गया है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के प्रवक्ता स्टेफ़न दुजारिक ने महासचिव की ओर से कहा है कि “हम सभी परिस्थितियों में मृत्युदंड के विरोध में हैं।” उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क के बयान का हवाला देते हुए कहा कि यह फैसला पीड़ितों के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण हो सकता है, लेकिन मृत्युदंड की सजा अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के विरुद्ध है।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने भी इस फैसले परकहा कि “हम इस सजा की प्रक्रिया से अवगत नहीं हैं, लेकिन निष्पक्ष न्याय प्रक्रिया और अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन अनिवार्य है।” उन्होंने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र बांग्लादेश से सुरक्षा क्षेत्र में “गंभीर और परिवर्तनकारी सुधार” की अपेक्षा करता है ताकि भविष्य में ऐसे मानवाधिकार उल्लंघन दोहराए न जाएं। 2024 में बांग्लादेश में सार्वजनिक सेवा नौकरियों में कोटा प्रणाली के खिलाफ शुरू हुए छात्र आंदोलन ने व्यापक विरोध प्रदर्शनों का रूप ले लिया था। इन प्रदर्शनों को राष्ट्रीय सुरक्षा बलों द्वारा कठोरता से दबाया गया, जिसके चलते कई मानवाधिकार उल्लंघन हुए। इसी पृष्ठभूमि में शेख हसीना और तत्कालीन गृह मंत्री असदुज्जमान खान को मानवता के खिलाफ अपराध का दोषी ठहराया गया।

संयुक्त राष्ट्र ने इस फैसले को “पीड़ितों के लिए न्याय की दिशा में एक कदम” माना है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि मृत्युदंड की सजा न केवल अमानवीय है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार सिद्धांतों के विपरीत भी है। संगठन ने बांग्लादेश सरकार से अपील की है कि वह न्यायिक प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए।