April 10, 2026
वर्ल्ड

Iran ने दस बिंदुओं पर बात करने की शर्त रखी, वरना युद्ध जारी मानेंगे

अमेरिका ने जो शर्तें ईरान को भेजी थीं उनसे ठीक उलट हैं ईरान की शर्तें

अमेरिका और ईरान मोटे तौर पर भले दो हफ्तों तक मिसाइलें और बम चलाने को रोकने पर सहमत हों और ईरान की सैन्य इकाइयों को फायरिंग रोकने को कह भी दिया गया हो लेकिन मुज्तबा खोमेनेई की तरफ से जारी संदेश में कहा गया है कि यह युद्ध का अंत नहीं है। नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने भी कहा है कि इसे युद्ध खत्म होने का संकेत नहीं माना जाना चाहिए और अमेरिका या इजराइल छोटी सी गलती करते हैं तो हमारी अंगुलियां ट्रिगर पर ही रखी हैं। ईरान ने अपनी जीत का दावा करने के साथ ही कहा है कि युद्ध के अधिकांश लक्ष्य हासिल कर लिए गए हैं और दुश्मन को ऐतिहासिक हार मिली है। ईरान ने होर्मुज खोलकर यदि झुकने का संकेत दिया है तो अमेरिका के 15-सूत्र वाले शांति प्रस्ताव के जवाब में दस सूत्रीय प्रस्ताव पाकिस्तान के हाथों भेजकर यह बताने की कोशिश की है कि वह हारा नहीं है बल्कि बराबरी से बात कर रहा है। ईरान का कहना है कि इन शर्तों पर सहमति के बाद ही वह युद्ध का अंत मानेगा और शर्तें नहीं मानी गईं तो जंग जारी ही मानी जाएगी। ईरानी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद का कहना है कि अमेरिका के साथ बातचीत दस अप्रैल को इस्लामाबाद में होगी जिसमें ईरान की रखी गई दसों शर्तों पर बात होगी। फारसी भाषा में जो दस सूत्र जारी किए गए हैं उनमें यूरेनियम संवर्धन की बात है लेकिन पत्रकारों को जो अंग्रेजी अनुवाद दिया गया है उसमें यह बिंदु गायब है। जबकि ट्रंप इस मुद्दे पर पूरी तरह साफ हैं कि ईरान को परमाणु कार्यक्रम खत्म करना ही होगा और इसके बिना बात बेमानी है। दस अप्रैल से जो बातचीत शुरू होगी उसके लिए ईरान ने जो शर्तें दी हैं उनमें होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही ईरानी सेना के समन्वय में करने और ट्रांजिट सिस्टम में ईरान की प्रमुख भूमिका रखने, सभी हमले बंद कराए जाने, अमेरिकी ठिकानों से सेनाएं वापस बुलाने, युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई, प्रतिबंध हटाने, विदेशों में जब्त ईरानी संपत्तियों को वापस करने के साथ ही यह लिखित भरोसा भी देने को कहा गया है कि अमेरिका अब ईरान पर हमला नहीं करेगा। जाहिर सी बात है कि ये सभी शर्तें वो हैं जिन पर अमेरिका का राजी होना बेहद मुश्किल काम होगा वहीं अमेरिका ने जो पंद्रह सूत्र भेजे थे वो ईरान के लिए गले उतारना मुश्किल है, ऐसे में बात किस दिशा में जाती है यह महत्वपूर्ण होगा लेकिन ये जो 15 दिन की शांति है उसमें काफी कुछ किया जाना है ताकि हालात फिर न बिगड़ें।