Iran को मौका था लेकिन वह तबाह होना चाहता है तो यही सही-ट्रंप
जेडी वेंस ने भी कहा ईरान ने फाइनल मौका गंवा दिया, पाकिस्तानी पीएम मिन्नत करते रह गए कि और बात कर लें
1979 के बाद पहली बार आमने सामने बात करने को तैयार हुए अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत इस गतिरोध के साथ टूट गई कि न तो ईरान यूरेनियम इनरिचमेंट की अपनी जिद छोड़ना चाहता है और न होर्मुज पर टोल वसूली का अपना सपना सरेंडर करना चाहता है। होने को तो ईरान की अमेरिका के सामने और अमेरिका की ईरान के सामने रखी गई सभी शर्तें ऐसी थीं जो न मानने लायक थीं लेकिन जब शुरुआत में ही इन दोनों मुद्दों पर बात अटक गई तो 22 घंटे की मेराथन बैठकें और पाकिस्तान की पूरी पूरी साख भी काम नहीं आई। पाकिस्तान ने अपने नागरिकों को सपना दिखाया था कि बस एक बार हम ईरान और अमेरिकी मामले में सफलता से चौधराहट कर लें तो फिर चारों तरफ से पैसा बरसने लगेगा। दुनिया पाकिस्तान की वाहवाही करेगी और हम इतने संपन्न हो जाएंगे कि नॉर्वे, डेनमार्क जैसे देशों की तरह बढ़िया जिंदगी जी सकेंगे। यह बात शरीफ ने हामिद मीर जैसे समझदार माने जाने वाले पत्रकारों को पए़ा दी थी और वो पिछले सप्ताह भर से यही रट लगाए हुए थे कि आप तो दुआ करें कि वार्ता सफल हो जाए। पाकिस्तानियों की दुआएं भी काम नहीं आईं और वेंस नाराज होते हुए जाकर अपने एयरफोर्स टू में जाकर बैठ गए, अमेरिका वापसी के लिए। अब सवाल यह पूछा जा रहा है कि क्या अमेरिका दो सप्ताह के अपने अपने युद्ध विराम का समय पूरा करेगा या फिर से ईरान पर हमले शुरु हो जाएंगे। इसका जवाब यह निकल रहा है कि ट्रंप पहले बाजार के सेंटीमेंट्स तय करने की कोशिश करेंगे और उनके जो दांव बाजार और तेल बाजार के लिए लगाए गए होंगे उसी के हिसाब से निर्णय लिया जाएगा। जहां तक इजराइल का सवाल है तो वह पूरी तरह तैयार है ईरान पर हमलों के लिए क्योंकि पिछले दिनों चल रही ईरान पर हमलों की रोक के बीच उसने हिजबुल्ला पर जमकर हमले किए और यह भी प्रकारांतर से ईरान की ही कमर तोड़ने जैसा था क्योंकि हिजबुल्ला या हमास या हूती ईरान के ही पैसों से बने हुए आतंकी संगठन हैं। 47 साल बाद हुई अमेरिकी और ईरान की सीधी बात के टूट जाने पर अब सवाल यही उठता है कि अगला कोर्स ऑफ एक्शन क्या होगा, वेंस तो बुरी तरह नाराज होकर यह कहते हुए ही बाहर निकले हैं कि हमने ईरान को एक शानदार मौका दिया था जो उसने गंवा दिया और ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा है कि हम ईरान को मौका देना चाहते थे लेकिन यदि वह तबाह होना ही चाहता है तो यही सही।
