Bangladesh के चुनावों में बीएनपी की भारी जीत, तारिक बनेंगे पीएम
दो तिहाई बहुमत हासिल किया है तारिक की पार्टी ने, शेख हसीना ने बताया ‘दिखावा’
1971 के बांग्लादेश मुक्त संग्राम के समय जो चार साल का बच्चा जेल में था आज उसे बांग्लादेश की जनता ने कमान सौंप दी है। 2026 के आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने दो तिहाई सीट जीत ली हैं और अब तारिक रहमान का प्रधानमंत्री पद संभालना तय है लेकिन भारत के लिए यह कोई अच्छी खर हो ऐसा भी नहीं है क्योंकि तारिक को हिंदूफोबिक व्यक्ति के ही रुप में पहचाना जाता है। लंबे निर्वासन के बाद बांग्लादेश लौटे तारिक की जीत इस मायने में अधूरी ही रहेगी क्योंकि इस चुनाव में शेख हसीना की पार्टी को चुनाव में उतरने ही नहीं दिया गया। हालांकि इस जीत के बाद अब बांग्लादेश का नेतृत्व दो ध्रुवीय राजनीति या किसी बिना चुने व्यक्ति के देश संभालने वाले दौर से मुक्त होने की संभावना तो जगाती ही है। 20 नवंबर 1965 को जन्मे तारिक ढाका यूनिवर्सिटी से पढ़े हैं और 1981 में उनके पिता और बांग्लादेश के राष्ट्रपति रहे जिया उर रहमान की हत्या के बाद उनकी मां 1991 से 2006 बीच दो बार पांच पांच साल के लिए प्रधानमंत्री रहीं। तारिक जिया के नाम से पहचान रखने वाले तारिक रहमान को उनकी पार्टी सबसे कम उम्र वाला बंदी बताती है जो 1971 के मुक्ति संग्राम में चार साल की उम्र में जेल में थे। ढाका में हुए 13वें संसदीय चुनावों के नतीजे में उनके नेतृत्व में बीएनपी गठबंधन ने 300 में से 209 सीटें जीत ली हैं। पिछले ही साल तारिक 17 साल के निर्वासन के बाद देश लौटे थे। तारिक रहमान कट्टरपंथी रुझानों और भारत विरोधी रुख के हैं और उनके आने से बांग्लादेश के चीन और पाकिस्तान के जाल में फंसने की संभावना भी जताई जा रही है। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक को बधाई देते हुए लिखा है कि भारत एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के समर्थन में खड़ा रहेगा और यहां ‘समावेशी’ शब्द पर ज्यादा जोर हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर दिया गया एक संकेत माना जा रहा है। हालांकि अपदस्थ की गईं और भारत की शरणार्थी शेख हसीना ने इन चुनावों को मात्र दिखावा बताया है। अब देखा यह जा रहा है कि क्या नई सरकार शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग को लेकर क्या रुख लेती है।
