March 9, 2026
देश

Twenty 20 world cup 2026 और नेतागिरी की मुश्किलें

अहमदाबाद में मैच हो तो अमित शाह या जय शाह ‘पास’ का मामला कैसे सेटल करते होंगे

आदित्य पांडे

रिकी मार्टिन क्रिकेट के मैदान पर “गोल गोल गोल” गा रहे हैं और जय शाह गोद में अपने बेटे को लिए उनकी टीम को नाचते गाते देख रहे हैं और यहां मैं हूं जिसकी चिंता ये है कि ये बंदा इतना सहज कैसे है। मेरे शहर में टिकट वाला कोई भी कार्यक्रम हो हर दूसरा कॉल उसके पास के लिए होता है। सोचिए अमित भाई शाह अहमदाबाद से बढ़कर अब दिल्ली पहुंचे हैं और जय अहमदाबाद में ही पल बढ़कर अब आइसीसी संभाल रहे हैं। फिर भाभी जी, अड़ोस पड़ोस, मोहल्ला, पार्टी वाले और पीएम को पहचानने वाले तक ऐसे कितने हो सकते हैं जो पास के लिए जय को फोन कर सकते हैं। वो रिकी मार्टिन के नाचने गाने को देखने में मशगूल है और यहां मैं गणित लगा रहा हूं कि यही मामला मेरे शहर का होता तो शायद जय को दस बीस मोबाइल सिर्फ इसलिए रखने पड़ते और शायद इससे भी ज्यादा नंबर बदलने पड़ते। यह तक हो सकता था कि जो पास उन्होंने अपने परिवार के लिए रख छोड़े हों उन्हें बांट कर खुद उन्हें मैच घर बैठकर देखने की नौबत आ जाती। मेरे शहर में तो पास मांगने की ऐसी संस्कृति है कि टिकट से ज्यादा पैसा भले पास ले लिए करने वाले फोन कॉल और उसके लिए भटकने में पेट्रोल पर खर्च हो जाए लेकिन जाना पास से ही है। यह भी आलम है कि वही कलाकार यदि किसी ओपन परफॉर्मेंस में है तो किसी की जाने में रुचि नहीं होगी लेकिन जहां टिकट का नाम आया तो उसी परफॉर्मेंस के लिए चौतरफा पास पास की डिमांड शुरू हो जाएगी। गरबे हों तो सारी भक्ति की शक्ति इस बात पर टिक जाती है कि पास कैसे जुगाड़ लिए जाएं। जय शाह मजे से मैच देख रहे हैं, उनका परिवार मैच का आनंद ले रहा है और मेरी इस बंदे से बस इतनी ही जलन है कि इतने सारे पास मांगने की संभावनाओं के बीच यह इतना रिलेक्स कैसे है। पास के लिए आने वाले कॉल से ये परेशान क्यों नहीं है और यदि ये फाइनल मैच के पास को लेकर परेशान नहीं है तो मेरे शहर के लोग हमारे लिए ऐसे सुकून की जगह क्यों नहीं छोड़ते जैसे अहमदाबाद वाले जय शाह के लिए रखते हैं…