February 11, 2026
देश दुनिया

Whatsapp पर किसी का डाटा सुरक्षित नहीं-रिपोर्ट

ऑस्ट्रिया के रिसर्चर्स ने कहा 3.5 अरब यूज़र्स की जानकारी खतरे में

दुनिया की सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप व्हाट्सएप को लेकर ऑस्ट्रिया की यूनिवर्सिटी ऑफ वियना के शोधकर्ताओं ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि इसमें ऐसी सुरक्षा खामियां हैं कि दुनिया भर के लगभग 3.5 अरब लोगों का डाटा लीक होने की कगार पर है और इसमें लोगों की निजी जानकारी, फोन नंबर, प्रोफाइल फोटो और प्रोफाइल टेक्स्ट तक बेहद आसानी से खुलकर सामने आ सकती है। यह अब तक का सबसे बड़ा डाटा खतरा माना जा रहा है। व्हाट्सऐप की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण इसकी आसान संपर्क पहचान प्रणाली है। जैसे ही कोई नया नंबर सेव किया जाता है, एप तुरंत बता देता है कि वह व्यक्ति यह सुविधा लेता है या नहीं, साथ ही उसकी प्रोफाइल फोटो और नाम भी दिखा देता है। लेकिन यही सुविधा, जब अरबों बार दोहराई जाए, तो एक खतरनाक डेटा-सोर्स बन जाती है।

यूनिवर्सिटी ऑफ वियना के शोधकर्ताओं ने व्हाट्सएप के ‘कॉन्टैक्ट डिस्कवरी’ फीचर में एक साधारण-सी कमजोरी को जब गंभीरता से समझा तो पता चला कि फोन नंबर एक-एक कर सिस्टम में डालकर यह जांचा कि कौन-से नंबर व्हाट्सएप पर सक्रिय हैं। रिपोर्ट के अनुसार शोधकर्ताओं ने पाया कि 3.5 अरब एक्टिव यूज़र्स के नंबरों की पहचान बेहद आसान तरीके से की जा सकती है। इनमें से 57 प्रतिशत इस्तेमााल करने वालों की प्रोफाइल तस्वीरें और 29 प्रतिशत के प्रोफाइल टेक्स्ट भी हासिल कर लिए गए। इस डाटा को इकट्ठा करने में व्हाट्सएप की ब्राउज़र-आधारित प्रणाली की एक और कमजोरी सामने आई—इसमें किसी तरह की गति सीमा नहीं थी। शोधकर्ताओं ने बताया कि वे हर घंटे लगभग 10 करोड़ नंबर चेक कर पा रहे थे। अगर यह डाटा किसी साइबर अपराधी के हाथ लग जाता, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते थे। शोधकर्ताओं ने अप्रैल 2025 में मेटा को इस बारे में आगाह भी किया और बाद में अपने पास मौजूद 3.5 अरब नंबरों का पूरा डाटासेट हटा दिया। मेटा ने अक्टूबर में इस कमी को दूर करने के लिए कड़े कोशिशें भी कीं इसके बाद भी खतरा खत्म नहीं हुआ। कंपनी का कहना है कि डाटा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध वो जानकारियां ही थीं जो इस्तेमाल करने वालों नेखुले तौर पर दी थीं जबकि जिनकी प्रोफाइल प्राइवेसी वाले तौर पर थी, उनकी फोटो और टेक्स्ट एक्सपोज़ नहीं हुए। साथ ही, कोई भी निजी संदेश या एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन वाली जानकारी नहीं खुली। दूसरी तरफ यूनिवर्सिटी ऑफ वियना के शोधकर्ता अलयोशा जूडमेयर का कहना है कि यह अब तक दर्ज किए गए सबसे व्यापक फोन नंबर और प्रोफाइल डेटा के एक्सपोज़र का उदाहरण है। उनके सह-शोधकर्ता मैक्स ग्यूनथर ने चेताया कि अगर वे यह जानकारी इतनी आसानी से निकाल सकते थे, तो संभव है कि अन्य लोग भी चुपचाप ऐसा कर चुके हों।

यह मामला सिर्फ तकनीकी खामी नहीं, बल्कि डिजिटल निजता और डेटा सुरक्षा के प्रति लापरवाही का भी संकेत है। 2017 में भी एक विशेषज्ञ ने इसी तरह की कमी के बारे में व्हाट्सएप को आगाह किया था लेकिन मेटा ने ठोस कदम नहीं उठाया। अब जबकि यह मामला सार्वजनिक हो चुका है, सवाल उठता है कि क्या यूज़र्स की सुरक्षा को लेकर टेक कंपनियाँ पर्याप्त सतर्क हैं? इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर हमारी निजी जानकारी कितनी असुरक्षित हो सकती है। व्हाट्सएप जैसे बड़े प्लेटफॉर्म को अब अपनी सुरक्षा प्रणाली को और मजबूत करना होगा, ताकि भविष्य में इस तरह की सेंध से बचा जा सके।