Vande Mataram को लेकर नए दिशानिर्देश सरकार ने बनाए
3 मिनट 10 सेकंड का राष्ट्रगीत अब हर बड़े सरकारी कार्यक्रम में अनिवार्य, सम्मान में खड़े होना भी होगा
राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ पर केंद्र सरकार ने जो नए दिशानिर्देश दिए हैं उनके अनुसार अब हर सरकारी कार्यक्रम में राष्ट्र गान ‘जन गण मन’ से पहले राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ बजाया जाना अनिवार्य होगा। गृह मंत्रालय ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि आधिकारिक मौकों पर ‘वंदे मातरम्’ के छह अंतरा वाले पूरे संस्करण गायन (या वादन)अनिवार्य है। इसके लिए 3. 10 का समय तय किया गया है। अब तक आमतौर पर दो ही छंद गाए जाते थे लेकिन अब पूरे छह पद गाए जाएंगे जिनमें कांग्रेस द्वारा 1937 में हटाए गए चार पद भी शामिल रहेंगे। राष्ट्रीय ध्वज फहराने, कार्यक्रमों में राष्ट्रपति के आगमन, उनके भाषणों या राष्ट्र के नाम संबोधन से पहले और बाद में अनिवार्य रहेगा। सरकारी कार्यक्रमों और बड़े सरकारी मौकों पर इसे अनिवार्य किया गया है। हर बार राष्ट्रगान से पहले राष्ट्रगीत गाए जाने और इसके सम्मान में हर व्यक्ति के खड़े होने को भी अनिवार्य
किया गया है। गृह मंत्रालय ने शैक्षणिक संस्थानों से अपेक्षा जताई है कि वे रोजाना स्कूल में प्रार्थना या जरूरी शैक्षणिक कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ गीत को बढ़ावा देंगे हालांकि सिनेमा हॉल को इससे दूर रखा गया है।
आइये विस्तार से जानें अपने राष्ट्रगीत को…
राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को बंकिम चंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी पर लिखा था। छह पदों के इस गीत में दो पद संस्कृत के और चार पद बंगाली व संस्कृत मिश्रण में हैं। इसकी प्रत्येक पंक्ति का अर्थ कुछ इस तरह निकलता है
प्रथम पद- ‘वन्दे मातरम्। सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्, शस्यश्यामलां मातरम्। वन्दे मातरम्॥’
भाव- मैं मां भारत को प्रणाम करता हूं। जहां भरपूर जल है, फलों-फूलों से भरी इस धरा पर हमें ठंडक प्रदान करने वाली हवा प्राप्त होती है। हरे-भरे खेत-खलिहान वाली मातृभूमि को मैं प्रणाम करता हूं।
दूसरा पद- ‘शुभ्रज्योत्स्ना पुलकित यामिनीम्, फुल्लकुसुमित द्रुमदलशोभिनीम्, सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम्, सुखदाम् वरदाम् मातरम्। वन्दे मातरम्॥’
भाव- भारतमाता को प्रणाम जो श्वेत चांदनी से जगमगाती रातों जैसी है, जो फूलों व पेड़ों से सज्जित है, मधुर मुस्कान और मीठी बोली वाली यह मां हमें सुख का वरदान देती है।
तीसरा पद- ‘कोटि-कोटि कण्ठ कल-कल निनाद कराले, कोटि-कोटि भुजोधृत खरकरवाले, के बोले मां तु्मि अबले, बहुबलधारिणी नमामि तारिणीम्, रिपुदलवारिणी मातरम्। वन्दे मातरम्॥’
भाव- करोड़ों लोगों के गले जिसकी जय-जयकार करते हैं, मां, तेरे हाथों में कितने ही अस्त्र हैं, कौन कहता है कि तू असहाय है? दुश्मनों का संहार करने वाली मां, हम तुम्हारी शक्ति और बाहुबल को नमन करते हैं।
चौथा पद- ‘तुमि विद्या तुमि धर्म, तुमि हदि तुमि मर्म, त्वमहि प्राणः शरीर, बाहुते तुमि मां शक्ति, हृदये तुमि मां भक्ति, तोमारै प्रतिमा गढि मन्दिरे-मन्दिरे। वन्दे मातरम्॥’
भाव- तुम ज्ञान हो, तुम धर्म हो, तुम हृदय और तुम आत्मा का सार भी हो। हमारे प्राण और शरीर में हे मां शक्ति तुम ही संचार करती हो। मेरा हृदय तुम्हारी ही भक्ति करता है। तुम्हारी मूर्ति हर (मन मंदिर) में गढ़ते हैं।
पांचवा पद- ‘त्वमहि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी, कमला कमलदलविहारिणी, वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम्, नमामि कमलाम्, अमलाम् अतुलाम्, सुजलां सुफलां मातरम्। वन्दे मातरम्॥’
भाव- तुम दस हाथों में अस्त्र धारित दुर्गा हो। वाणी और विद्या का वर देने वाली, कमल के फूलों में रहने वाली तुम ही लक्ष्मी है। निर्मल और अतुल्य, सजीव, फल-फूल वाली माता मां, मैं तुम्हें नमन करता हूं।
छठवां पद- ‘श्यामलाम् सरलाम् सुस्मिताम् भूमिताम्, धरनीम् भरनीम् मातरम्। वन्दे मातरम्॥’
भाव- हे मां, तू हमारी आन, शान और सुख-संपत्ति है। ऐसी मेरी मातृभूमि को मैं प्रणाम करता हूं।
