UCC अब गुजरात में भी सभी के लिए समान कानून
बहुविवाह, हलाला और तलाक को लेकर बदलेगा मामला, वारिस वसीयत के भी नियम ज्यादा साफ
गुजरात में अब यूनिफॉर्म सिविल कोड को विधानसभा ने इसे पारित कर दिया है, इससे पहले उत्तराखंड और गोवा में यूसीसी लागू हो चुका है। इसके लागू होने के बाद शादी, तलाक, विरासत, लिव-इन वगैरह में सभी धर्मों, पंथों, पर समान कानून लागू किये जा सकेंगे। गुजरात में यह यूसीसी बिल अनुसूचित जनजाति (एसटी) या उन समुदायों पर लागू नहीं होगा जिनके पारंपरिक अधिकार संविधान के तहत सुरक्षित हैं। गुजरात सरकार ने यूसीसी की जरुरत और इससे जुडे कानूनी सुझाव के लिए एक कमेटी बनाई गई थी। इस कमेटी ने पिछले हफ्ते अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें उसने शादी, तलाक, उत्तराधिकार, बच्चे गोद लेने जैसे मामलों में यूनिफॉर्म सिविल कोड अपनाने की सिफारिश की गई थी। इस नियम का सबसे पहला प्रभाव तो शादी को लेकर ही है क्योंकि यह एक से अधिक शादी पर रोक लगाता है। अगर किसी का पहले से जीवनसाथी है, तो उनकी शादी को मान्यता नहीं दी जा सकती। शादी की उम्र का बंधन भी अब सभी के लिए समान होगा। अभी तक हिंदू, मुस्लिमों के लिए अलग नियम थे। कोई एक भी पक्ष गुजरात का हो तो हर शादी का रजिस्ट्रेशन भी जरूरी होगा भले वह कहीं भी हुई हो। रजिस्ट्रेशन दो महीनों में नहीं कराया गया तो दस हजार रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। जबरन या धोखा देकर या दबाव से शादी करने के मामलों में 7 साल तक सजा संभव है। बहुविवाह पर भी 7 साल की सजा हो सकेगी। तलाक भी अदालत की मंजूरी के बाद वैध होगा और बिना कोर्ट की सहमति हुए अमान्य तलाक के मामलों में तीन साल तक की सजा का प्रावधान है। हालांकि पति-पत्नी कोर्ट की इजाजत से बिना तलाक भी अलग रह सकते हैं यानी शादी मान्य होगी लेकिन दोनों साथ रहने के लिए मजबूर नहीं होंगे। शादी के एक साल पूरा होने तक तलाक की अर्जी खास मामलों में ही दी जा सकेगी। यूसीसी लागू होने से ‘हलाला’ प्रथा पर भी रोक लग जाएगी हालांकि इस प्रथा का नाम नहीं लिया गया है लेकिन जिस प्रावधान में कहा गया है कि तलाक या शादी रद्द करने का ऑर्डर हो जाने के बाद भी पति-पत्नी कानूनन दोबारा शादी कर सकेंगे उसका मतलब यही है कि हलाला पर रोक होगी। कोड ने लिव-इन रिलेशनशिप को भी कानूनी मान्यता दी है। लिव-इन में हुए बच्चे को जायज बच्चा माना जाएगा।
