February 11, 2026
देश दुनिया

Supreme Court ने कहा डॉग बाइट के मामले बेहद गंभीर

लगातार चल रही सुनवाई में कपिल सिब्बल ने कहा जानवर तभी हिंसक जब हम सताएं

गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों से जुड़े खतरों और नागरिक अधिकारियों की कथित कमियों पर केंद्रित याचिकाओं की सुनवाई फिर से शुरू की। कोर्ट ने कहा कि देशभर में बढ़ते डॉग-बाइट मामलों और सड़क हादसों ने इस मुद्दे को बेहद गंभीर बना दिया है। अदालत की इस मुद्दे पर जो प्रमुख टिप्पणियां कीं वो इस तरह हैं, पहली टिप्पणी में कोर्ट ने कहा कि बच्चे और वयस्क दोनों ही लगातार हमलों का शिकार हो रहे हैं और कई मामलों में जानें भी जा चुकी हैं। इसके अलावा संस्थागत क्षेत्रों पर फोकस करते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि उसने सभी कुत्तों को सड़कों से हटाने का आदेश नहीं दिया है, बल्कि अस्पतालों, स्कूलों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों में उनकी मौजूदगी को खतरनाक बताया है। यह भी कहा गया कि कुत्ता किस मूड में है यह तय करना मुश्किल होता है और यही बात खतरा बनती है। अदालत ने कहा कि एनिमल बथ कंट्रोल के लिए बनाए गए नियमों का पालन न करने से ही स्थिति बिगड़ी है और नागरिक निकायों को इस तरफ ध्यान देना ही होगा। कपिल सिब्बल ने जानवरों पर करुणा दिखाने का तर्क देते हुए कहा कि जानवर सिर्फ उनके क्षेत्र में दखल देने पर वे आक्रामक होते हैं। वहीं पशु अधिकार संगठन का कहना है कि कुत्तों को प्यार करने वाले लोगों के लिए हालात ठीक नहीं हैं इसलिए जानवरों के अधिकारों को लेकर कोर्ट को चिंता रखनी चाहिए। नगर निगमों और स्थानीय निकायों के विफल रहने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि हम हमलों की तो बात करते हैं लेकिन यह नहीं बताते कि इंसान भी उन्हें उकसाने से बाज नहीं आते हैं। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि समाधान केवल कुत्तों को पकड़कर संस्थागत क्षेत्रों से हटाने और स्टरलाइजेशन के बाद उन्हें वापस छोड़ने में है। अदालत ने यह भी कहा कि सड़क हादसों और डॉग-बाइट्स को रोकने के लिए नागरिक निकायों को तुरंत ठोस कदम उठाने होंगे।