Repubilc Day गण ‘तंत्र’ के श्रीगणेश का दिन
- आदित्य पांडे
सर्वप्रथम पूजे जाने वाले गणपति या कहें श्रीगणेश में जो गण शब्द है वहीं गणतंत्र वाले गण भी छुपे हुए है। ‘गणांना नाम त्वा गणपति’ के साथ यदि आप गण और उनके अधिपति गणाध्यक्ष को जोडें तो महसूस होगा कि गणतंत्र का हमारे लिए क्या महत्व है और आज यदि गणों के लिए एक सुविचारित तंत्र चलाने वाला संविधान सर्वोपरि माना जाता है तो यह भारत के मूल स्वभाव से कितना मिलने वाला स्वाभाविक भाव है। इस बार गणतंत्र दिवस समारोह के पर को कर्तव्य पथ पर देश की क्षमताओं को दिखाने वाल झांकियां और परेड हैं। राष्ट्रपति सलामी ले रही हैं। प्रधानमंत्री सबसे पहले राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पहुंचकर मातृभूमि के लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग करने वाले बहादुरों को श्रद्धांजलि देते हैं तो जन ‘गण’ मन का हर्षित होना तय ही है। जब गणेश मंदिर में कोई प्रार्थना करने वाले श्रद्धालु के मन की मुराद पूरी हो जाती है तो वह गण की जीत ही है और जब सरकारें अपने लेखे जोखे गण के सामने पेश कर बताती हैं कि वो किस तरह जन गण मन के लिए न मन से लगी हुई हैं तो यह भी उस गण की जीत है। यदि स्व ‘तंत्र’ होने का जुनून हमे देश के लिए कुर्बान होने तक का जज्बा देता है तो गण ‘तंत्र’ के लिए भी उतनी ही शिद्दत से हमारी भावनाओं का ज्वार उभरना ही चाहिए। आप सभी को स्व तंत्र देश के गण तंत्र पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।
आज के समारोह के मुख्य अतिथि यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन रहे। राष्ट्रपति भवन से लेकर राष्ट्रीय युद्ध स्मारक तक के कर्तव्य पथ को राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष, भारत की अभूतपूर्व प्रगति, मजबूत सैन्य शक्ति, समृद्ध सांस्कृतिक विविधता और जीवन के सभी क्षेत्रों के लोगों की भागीदारी के अविस्मरणीय संगम की प्रस्तुतियों से सजाया गया। विविधता में एकता’ थीम पर 100 सांस्कृतिक कलाकार परेड की शुरुआत की। 129 हेलीकॉप्टर यूनिट के चार एमआई-17 1वी हेलीकॉप्टर ध्वज फॉर्मेशन में फूलों की पंखुड़ियों की गई।
