Plane क्रैश की पहली जांच रिपोर्ट और दल पर सवाल
ऐसा कैसा जांच दल और ऐसी कैसी रिपोर्ट
अहमदाबाद में 12 जून को हुई विमान दुर्घटना की जांच को लेकर एक संस्था ने पहली जांच रिपोर्ट पर आपत्ति लेते हुए कहा है कि इसमें पायलेट्स को बेवजह ही दुर्घटना के जिम्मेदार होने का संकेत दिया गया जो गलत था. इस बात पर सुप्रीम कोर्ट ने भी सहमति जताई है. दरअसल इस संस्था ने जांच दल के गठन से लेकर उसकी प्रारंभिक रिपोर्ट तक पर बिंदुवार आपत्ति ली है.
इसमें कहा गया है कि जांच टीम के सदस्य ऐसे थे जिनका इस मामले में कॉन्फलिक्ट ऑफ इंटरेस्ट हो सकता है. अदालत में अपनी बात रखते हुए संस्था ने कहा है कि रिपोर्ट में महत्वपूर्ण जानकारियां छुपाई गई हैं. पहली जांच रिपोर्ट जारी करते समय न तो पूरा डिजिटल फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर आउटपुट सामने रखा गया और न, टाइम स्टैम्प के साथ पूर्ण कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर ट्रांसक्रिप्ट या इलेक्ट्रॉनिक एयरक्राफ्ट फॉल्ट रिकॉर्डिंग डेटा के बारे में बताया गया जो दुर्घटना के बारे में समझने के लिए जरुरी हैं. इस साल 12 जून को एयर इंडिया का बोइंग 787-8 विमान अहमदाबाद से उड़ान भरने के चंद सेकंड के अंदर ही पास के मेडिकल हॉस्टल पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया जिसमें 241 यात्रियों और चालक दल के अलावा होस्टल के 24 लोगों की भी मृत्यु हुई थी. पहली रिपोर्ट में संकेत दिया गया था कि शायद पायलट में से एक ने फ्यूल कटऑफ स्विच को लेकर पूरी सावधानी नहीं बरती थी जबकि सच यह है कि बोइंग के कई विमानों में इसे लेकर शिकायतें मिल चुकी हैं.
