February 11, 2026
देश दुनिया

Parliament में विपक्ष का वही पुराना रवैया, नहीं चलने दिए सदन

पहले ही दिन लोकसभा में एसआईआर को लेकर हंगामा, खड़गे ने राज्यसभा में दिया फिजूल बयान

संसद का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से शुरू हो गया है। यह सत्र 19 दिसंबर तक चलेगा और कुल 19 दिनों में 15 बैठकें होंगी। यह 18वीं लोकसभा का छठा सत्र है, जिसमें सरकार ने कई अहम विधेयक पेश करने की योजना बनाई है। लेकिन शुरुआत से ही सत्र का माहौल गरमाता दिखा। विपक्ष ने एसआईआर मुद्दे पर सरकार को घेरने की रणनीति अपनाई, जिसके चलते लोकसभा की कार्यवाही पहले ही दिन स्थगित करनी पड़ी। दोपहर बारह बजे बाद जब फिर कार्रवाई शुरु हुई तो हंगामा जारी रहा और कार्रवाई दोबारा स्थगित करनी पड़ी। संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत होते ही लोकसभा में विपक्ष ने एसआईआर मुद्दे पर जोरदार हंगामा किया। आने वाले दिनों में विपक्ष और सरकार के बीच तीखी बहस और टकराव देखने को मिलेगा।

राज्यसभा में उपराष्ट्रपति का स्वागत और प्रधानमंत्री का भाषण
राज्यसभा में सत्र की शुरुआत एक अलग अंदाज में हुई। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन सभापति के रूप में राज्यसभा की कार्यवाही का संचालन कर रहे थे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने उनका स्वागत किया और उनकी जमकर तारीफ की। मोदी ने कहा कि उपराष्ट्रपति एक साधारण किसान परिवार से आते हैं और उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज सेवा के लिए समर्पित किया है। उन्होंने उन्हें समाज सेवा में रुचि रखने वालों के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शक बताया। मोदी ने कहा कि उपराष्ट्रपति छात्र जीवन से ही नेतृत्व भाव रखते थे और आज राष्ट्रीय नेतृत्व के रूप में यहां विराजमान हैं, जो गर्व का विषय है। प्रधानमंत्री ने उनके संगठन कौशल की भी सराहना की और कहा कि उन्होंने हमेशा सभी को जोड़ने का प्रयास किया और नई पीढ़ी को अवसर देने की कोशिश की। मोदी ने झारखंड में आदिवासी समुदायों के साथ उनके जुड़ाव का उल्लेख करते हुए कहा कि वे छोटे-छोटे गांवों में भी जाते थे और लोगों से सीधे जुड़ते थे। उन्होंने कहा कि उपराष्ट्रपति प्रोटोकॉल से परे रहकर सेवा की भावना से काम करते रहे हैं। इससे पहले सत्र की शुरुआत के लिए जाते हुए संसद से बाहर मोदी ने विपक्ष को समझाइश दी कि उसे चुनावी हार को भूलकर अब सकारात्मक विपक्ष की भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्र को प्रगति की ओर तेज गति से ले जाने के जो प्रयास चल रहे हैं, उसमें ऊर्जा भरने का काम ये शीतकालीन सत्र करेगा। बीते दिनों बिहार चुनाव में भी मतदान में जो तेजी आई है, वो लोकतंत्र की ताकत है। उन्होंने कहा कि विपक्ष भी पराजय की निराशा से बाहर निकलकर सार्थक चर्चा करे। दुर्भाग्य से कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो पराजय भी नहीं पचा पाते। लेकिन मेरा सभी दलों से आग्रह है कि शीतकालीन सत्र में पराजय की बौखलाहट को मैदान नहीं बनना चाहिए और ये विजय के अहंकार में भी परिवर्तित नहीं होना चाहिए। बहुत ही जिम्मेदारी के रूप में देश की जनता की जो हमसे अपेक्षा है, उसे संभालते हुए आगे के बारे में सोचें।’ वहीं राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे ने सभापति को लेकर कह दिया कि पिछले सभापति को हमें तरीके से विदा करने का मौका भी नहीं मिला, भाजपा के सदस्यों ने खउ़गे की इस टिप्पणी पर आपत्ति जताई।