February 16, 2026
देश दुनिया

MP Ravan वाला मामला आखिर पेंच क्या है

इंदौर निवासी रोहिणी घावरी के आरोपों और फिर आत्महत्या की धमकी के बाद ज्यादा उलझे सांसद चंद्रशेखर

मामले में सनसनी तो तभी से आ गई थी जब एक सांसद महोदय पर एक दलित पहचान के साथ बड़ी स्कॉलरशिप पर स्विटजरलैंड गई लड़की ने आरोप लगाए थे लेकिन ऐसा नहीं कि रोहिणी घावरी और चंद्रशेखर रावण यानी भीम आर्मी के मुखिया के बीच कहानी यहां से शुरु हुई. रोहिणी ने काफी पहले चेतावनी दी और अब बताया जा रहा है कि उसने जहर भी खा लिया है और उसे बचा भी लिया गया. अब वह कह रही है कि मैं सांसद रावण को मार कर ही मरुंगी बेवजह नहीं मरने वाली. आखिर यह पूरा एपिसोड है क्या, आइये समझते हैं. इंदौर में एक गरीब कहे जा सकने वाल परिवार, दलित की पहचान के साथ पिता नेताओं के झंडे उठाने और दरी बिछाने का काम करता है ताकि किसी दिन नेताजी खुश मूड में दिखें तो पत्नी की नौकरी नगरनिगम के सफाई अमले में ही लगवाने की सिफारिश का कह सकें. इनकी बेटी है जो काफी तेजतर्रार है और वह एक्टिविस्ट के तौर पर काम करने लगती है. कोई एक खास मुद्दा नहीं, जब जिस पलड़े में फायदा लगा वहां के लिए एक्टिविस्ट का काम करना शुरु. बाहर निकली, दुनिया दिखी, पता चला कि थोड़ा जुगाड़ जमा लिया जाए तो दलितों के नाम पर तो पैसा बह ही रहा है. किसी पार्टी से कोई बैर नहीं, कांग्रेस, भाजपा, बहुजन समाज पार्टी या भीम आर्मी. जब जो काम का लगे वह आका. जोड़तोड़ सही बैठती गई और पढ़ाई के नाम पर एक करोड़ रुपए सरकार ने मंजूर कर दिए. यूनिवर्सिटी पसंद आई स्विटजरलैंड, जब जीवन का आनंद ही लेना है तो धरती के स्वर्ग का ही आनंद लिया जाए.
अब तक की दलित राजनीति में नया तड़का लगाकर मायावती का नया संस्करण बनने का सपना देख रहे चंद्रशेखर से रोहिणी की मुलाकात होती है, दोनों को म्यूचुअल फायदे का सौदा नजर आता है. दोनों दलित समाज के लिए नई राहें खोलने स्विटजरलैंड की वादियों में कस्मेवादे की तरह लेते हैं. चंद्रशेखर बिखरने लगते हैं तो रोहिणी का फेविकोल उन्हें जोड़ता है और रोहिणी की उम्मीदें धूमिल होती हैं तो रावण उनमें एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की सी ऊर्जा भर देते हैं. पढ़ाई के लिए मिला पैसा पार्टीबाजी में फूंका जाता है, राजनीतिक भी और जश्न वाली पार्टी में भी पढ़ाई वाला पैसा काम आता है. रोहिणी का फेविकोल काफी मजबूत निकलता है और रावण चुनाव में जीतकर संसद की राह पकड़ लेते हैं लेकिन रावण के इथेनॉल वाले पेट्रोल से रोहिणी की गाड़ी गड़बड़ा जाती है. वो पीछे से आवाज लगाती हैं ‘ओ दूर के मुसाफिर हमको भी साथ ले ले’ लेकिन रावण अपने चिपकाए गए नाम के अनुसार हरकतें करने लगता है. कहां तो यह तय हुआ था कि यदि रावण सांसद नहीं बन सके तो रोहिणी को राज्यसभा में भेजने के लिए पूरी ताकत लगाई जाएगी और कहां रावण ने खुलासा कर दिया कि न सिर्फ उनके पास अपनी निजी मंदोदरी मौजूद है बल्कि मेघनाद वगैरह भी उपलब्ध हैं. इधर से ऑफर आया कि जब रावण ही हो तो रानियों की संख्या क्या गिनना? राजनीतिक सूझबूझ और विरासत संभालने वाली होने के लिए हम तैयार हैं लेकिन रावण तब तक अगले सफर पर निकल चुका था. रानी पटरानी के ऑफर्स दे देकर न जाने कितनी बांदियां उसने पहले ही बना डाली थीं और फिर ‘रात गई बात गई’ वाला हिसाब भी उनके गले उतार दिया गया था. स्विटजरलैंड से रोज नए खुलासे होने लगे, फोटो पर फोटो, ब्रेकिंग पर ब्रेकिंग, धड़ाधड़ इंटरव्यू लेकिन रावण भी कम शातिर नहीं. उसने हर बाउंसर को डक कर निकाल दिया. जब बॉलर हैरान हो गया तो अब उसने सार्वजनिक घोषणा की कि रावण मुझे खुद नहीं मार पाया लेकिन मैं खुद उसके नाम पर जहर पी लेने वाली हूं, यह घटना आज ही अंजाम दी जाएगी इसलिए जो भी मुझे बचाना चाहें उनका स्वागत है, जो इस बहाने चंद्रशेखर की हरकतों को गरिया सकें उनको भी धन्यवाद है और बाकी की स्क्रिप्ट अब कुछ दिन अस्पताल से चलेगी जहां जहर से बच जाने के बाद उसे उगलने का मेरा कार्यक्रम शुरु होगा और इस बार मामला इसलिए सीरियसली लिया जाएगा क्योंकि बात जहर से होकर आगे बढ़ेगी.