भाषा हमें बनाती है,हम भाषा को नहीं….
जब कोई भाषा नष्ट होती है तो उस राष्ट्र की वंशावलियां भी नष्ट होती हैं…– डॉ.छाया मंगल मिश्रराष्ट्र भाषा के
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Read More-हिंदी दिवस(14 सितंबर) पर विशेष एक भाषा के रूप में हिंदी न सिर्फ भारत की पहचान है, बल्कि हमारे जीवन
Read More‘मैं हिन्दी हूं’ एक भावपूर्ण आलेख -स्मृति आदित्य -मैं हिन्दी हूँ। बहुत दुखी हूँ। स्तब्ध हूँ। समझ में नहीं आता
Read Moreछाया मंगल मिश्रा -यदि भगवान मुझे अंग्रेजी उपन्यास ‘द टाइम मशीन’ की तर्ज पर ‘टाइम ट्रेवल’ की अनुमति दे दे
Read Moreशुचि कर्णिक- भारत का हृदय मध्य प्रदेश और भोपाल इसकी राजधानी मेरा ह्रदय देवास और भोपाल मेरी ग्रीष्म कालीन राजधानी.मेरे
Read More-सहबा ज़ाफरी “बस भी करो यार! तुम्हारे बगैर हम क्या मज़े करें!! ” उसने तुनकते हुए कॉल डिस्कनेक्ट की और
Read More–डॉ.छायामंगल मिश्रयशस्विनी, प्रगति, मुस्कान, निकिता सिंघानिया, प्रतिमा सिंग, सोनम रघुवंशी और भी इनके जैसी कई क्रूरता, बर्बरता, पिशाचिनी, नारी जाति
Read Moreरीमा दीवान चड्ढा – जगदलपुर में हमारा कॉलेज धरमपुरा में था.जो लगभग 8 कि.मी. दूर था.अपनी साइकिलों पर हम सब
Read Moreमूल्यबोध और राष्ट्रहित बने मीडिया का आधार –प्रो. संजय द्विवेदी हिंदी पत्रकारिता दिवस हम 30 मई को मनाते हैं. इसी
Read Moreजरूरी है मीडिया का भारतीयकरण -प्रो.संजय द्विवेदी यह ‘शब्द हिंसा’ का समय है. बहुत आक्रमक, बहुत बेलगाम. ऐसा लगता है
Read Moreभले ही लोगों के लिए प्यार का महिना फरवरी हो पर अपने जैसों के लिये तो बारह मास ही बसंत
Read Moreनजर मीडिया पर- आदित्य पांडे‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ ने इस बार तय किया है कि वह इस बार तटस्थ रहेगा और
Read More-ईशु शर्मा अजीब हेडलाइन है न? अनन्या पांडे और जर्नलिज्म का क्या ताल्लुक है? दरअसल अनन्या पांडे की एक नई
Read More-ज्योति जैन‘‘मम्मा…… वो देखो…….! काऊ की ’पोट्टी’…….‘‘शिट्…… कहते कहे उस नन्हीं की बूची नाक ने मानो कुछ सूंघते हुए मुँह
Read More–डॉ. सहबा जाफ़री ईद मिलादुन्नबी – “अरे कम्बखतों! मीठे हुए नीम में इतना पानी नहीं देते!” बीजी हाथों में तज्बीह
Read More–डॉ.छाया मंगल मिश्रबात सिर्फ शहीद अंशुमन की पत्नी की नहीं है…पिछले दिनों अंशुमन की पत्नी का सम्माननिधि व चक्र पर
Read Moreडॉ.छाया मंगल मिश्र (शिक्षाविद, लेखक)मुझे हमेशा से ही ऐसे लोगों की नीयत पर शक होने लगता है जो सीधे सीधे
Read More-डॉ. छाया मंगल मिश्र -‘बाई मेरी किताब नहीं मिल रही?’-‘वहीं रखी होगी देख; पाटी पर’ -आशादी, रेखादी, सुनंदी, गुड्डू भैय्या,
Read MoreHappy Teachers Day
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Read Moreप्रोफेसर संजय द्विवेदी समता, ममता और समरसता हमारे भारतीय लोकजीवन का अभिन्न अंग है. हम जिस देश में रहते हैं
Read Moreआलोचकों की परवाह न कर अपनी राह चलते हैं प्रधानमंत्री –प्रो.संजय द्विवेदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में कुछ तो खास है
Read Moreमौन का विस्तार अनन्त है या यह भी कहा जा सकता हैं कि मौन की व्यापकता सीमा से परे होकर
Read More-सेहबा जाफ़री लिल्लाह! यह गोपाल भाई हैं!! मैंने देखा और खूब ग़ौर से देखा, बचपन से लगा जवानी तक जिन गोपाल
Read Moreआलेख– स्मृति आदित्य/पत्रकार 4 अगस्त 2024 मित्रता दिवस विशेष दोस्ती, एक सलोना और सुहाना अहसास है, जो संसार के हर
Read More-आदित्य पांडे यह ओलिंपिक है या…एथेंस, ग्रीस में जब ओलिंपिक खेलों की शुरुआत हुई थी तो शर्तिया यह खेलों से
Read More–प्रो.संजय द्विवेदी यह नवें दशक के बेहद चमकीले दिन थे. उदारीकरण और भूमंडलीकरण जिंदगी में प्रवेश कर रहे थे. दुनिया
Read More–शुचि कर्णिक, स्वतंत्र पत्रकार, ब्लॉगर किसी भी किस्से या कहानी में दो बातें ख़ास होती हैं, एक किरदार और दूसरी
Read More– शुचि कर्णिक (स्वतंत्र पत्रकार/ब्लाॅगर) -अगर कोई कहे कि अब रिश्तों में वो गर्माहट नहीं रही,या कोई किसी का नहीं
Read Moreनाम गुम जाएगा बनाम डैडनेम -आदित्य पांडे दुनिया से चले गए किसी भी शख्स का नाम बाकी रह जाता है
Read More–आदित्य पांडे इक जरा सी बात पर …बात निकल जाए तो पता नहीं कितनी दूर तक चली जाएगी. देखिए न,
Read Moreप्रो. (डॉ.) संजय द्विवेदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अपने दोनों कार्यकालों में पश्चिमी नेताओं के साथ अब तक के सबसे
Read Moreज्योति जैन -हम हिन्दुस्तानी है, यहाँ रहते हैं, जीते हैं और पूरा समय बस अंग्रेजी सीखने में निकाल देते हैं
Read Moreन्यूज रुम पर कसती जा रही है एआई की जकड़न -प्रो. (डॉ.) संजय द्विवेदी “माननीय प्रधानमंत्री जी हम आभारी हैं
Read More– अनन्या मिश्रा -बचपन में पापा के बजाज स्कूटर पर सवारी करने का रोमांच ही अलग था। सामने खड़े होकर,
Read More‘द ब्लू कप’, हसीन शाम और पागलखाना ब्लॉग- सहबा जाफरी, स्वतंत्र लेखक, ब्लॉगर नैना जब से अपनी मेडिकल की पढ़ाई
Read Moreयात्रा संस्मरण– शुचि कर्णिक (लेखक, स्वतंत्र पत्रकार) सुनने में शायद यह अजीब लगे क्योंकि बानझाकरी गंगटोक में स्थित एक वॉटरफॉल
Read Moreडॉक्टर मुखर्जी के व्यक्तित्व और कृतित्व की एक झलक प्रो.संजय द्विवेदी भूमि, जन तथा संस्कृति के समन्वय से राष्ट्र बनता
Read More–डॉ.छाया मंगल मिश्र -हाथरस के नारायण हरि साकार मामले के बाद फिर सब बाबा जोगड़े चर्चे में हैं…ये ज्ञान बांटने
Read More-छुटके बचपन, बड़की यादें…टांड पर जमा बचपन, याद आता है हर पल -डॉ. छाया मंगल मिश्र (लेखिका जानी मानी शिक्षाविद
Read Moreयात्रा संस्मरण– शुचि कर्णिक (लेखिका, स्वतंत्र पत्रकार) पिछली किश्त में आपने पढ़ा– कैसे जीवन की तमाम प्रतिकूलताओं को पार करके
Read Moreलोकसभा चुनाव के दौरान इस बार जिस तरह से भाषा की मर्यादाएं भंग हुईं वह शुरुआत भर थी, गालिंब के
Read Moreडॉ. सहबा जाफरी का ब्लॉग : आख़िरी औरतें -डॉ. सहबा जाफरी -वे कौन सी औरतें थीं जो तड़के उठ, आँगन
Read More–सावधान!! रील्स-शॉर्ट फिल्म तबाही ला रहे हैं-सोनाक्षी, दीपिका, बिग बॉस,वेज-नॉनवेज के अलावा भी दुनिया में झांक लीजिए डॉ.छाया मंगल मिश्र
Read More-काम तो करना ही है- कर भी रहे हैं। बस हम थोड़ा एक्स्ट्रा करते हैं क्योंकि ‘एक्स्ट्राऑर्डिनरी’ करने की आदत है। पर हमारा वो ‘एक्स्ट्रा’होना, अब ऑर्डिनरी रह गया है। blog on office politics
Read Moreचंदेरी के बुनकरों ने जो विरासत संजोई और आगे बढ़ाई –डॉ.शिवा श्रीवास्तव हैंडलूम पार्क के एक हिस्से में घुसते ही
Read Moreअपना मान सम्मान, आत्मविश्वास, निर्णय लेने की आज़ादी और अपनी पसंद के काम करने की छूट हर स्त्री को मिलनी ही चाहिए। यदि न मिले तो उसे छीन कर लेनी होगी पर लेनी होगी…। जी लो जी भर के…
Read Moreदूसरों के जीवन में दखलअंदाजी से बचिए भिया… –डॉ.छाया मंगल मिश्र -प्लीज यार सोशल मीडिया पर मुझे टैग मत करना..
Read Moreनई बहू तैयार हो रही, इन्हें कमरे में जाना. ससुर/सास ने मना किया. अभी बहू नीचे आ जाएगी मिलने . नहीं जी इन्हें उसका कमरा देखना कैसा सजाया/ तैयार किया? कौन करता है ऐसा? बेटियों के कमरे झाँकने की बेशर्मी?
Read Moreपूरे समय बेटी के घर में उसके सास-ससुर, भरा पूरा परिवार होते हुए भी बार बार उनके घर में डेरा डाल के पड़े रहने का क्या कोई तुक बनता है. हां यदि परिस्थितियां प्रतिकूल हों, अनिवार्यता हो, इकलौती संतान हो, कोई आगा पीछा न हो तो हक़ और दायित्व दोनों बनते हैं. पर बार बार हमेशा तो उचित नहीं. किसी के घर अकारण बहू की मां जमी हुई है, कहीं पिताजी रुक गए, भाई बहन तो रिफ्रेशमेंट सेंटर बना लेते हैं.
Read Moreडॉ.छाया मंगल मिश्र (शिक्षाविद, लेखक) -‘सास ननद तो शक्कर की हों तो भी बुरी ही होतीं हैं.’इनमें घर में यदि
Read Moreट्रैवल ब्लॉग… शुचि कर्णिक (पत्रकार, स्वतंत्र लेखक) और भी ग़म हैं ज़माने में मुहब्बत के सिवाजैसे मेरे गम में ग़म
Read Moreसाल की शुरुआत में चेतावनी थी कि यह सबसे गर्म साल होगा. इसमें सागर की ऊपरी सतह को उबालने वाले
Read Moreआर्थिक-सामाजिक विकास तथा सामाजिक न्याय ही रहेगा एजेंडा -प्रो.संजय द्विवेदी (लेखक वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार हैं) लोकसभा चुनाव में नरेन्द्र
Read Moreदूसरों की कॉपी सिर्फ उतनी ही करनी चाहिए जितनी शोभा दे.
Read More-रीमा दीवान चढ्ढा -सुबह की पहली किरण ,ताज़गी और एक नया दिन।शुरुवात एक कप चाय से। सुबह की पहली चाय,सुकून
Read Moreबेजुबान पेड़, आसरा ढूंढते जीवों की गुहार… -डॉ.छाया मंगल मिश्र – घरों में कबूतर, पक्षी, छतों पर बंदर, झाड़ों पर
Read Moreविश्व पर्यावरण दिवस पर गांधीजी का संदेश प्रोफेसर मनोज कुमार – पर्यावरण प्रदूषण वैश्विक संकट बनकर हमारे सामने खड़ा है.
Read Moreआलेख – स्मृति आदित्य -पर्यावरण दिवस 2024 5 जून को मनाया जाएगा, प्रकृति हमें कई तरह के सुख देती है,
Read Moreडॉ.छाया मंगल मिश्र -ब्लॉग-एकांत/अकेलापन दोनों में बहुत अंतर होता है. एकांत सुख शांति होता है पर अकेलापन आत्मा के खालीपन
Read Moreएक घर की लड़ाई,अन्य घरों का मजा… डॉ.छाया मंगल मिश्र – ब्लॉग- बंदर बांट कहानी सुनते पढ़ते रहे हैं. दो
Read Moreजिम्मी और जनक मगिलिगन फाउंडेशन के पर्यावरण संवाद सप्ताह में पांचवें दिन सोलर ड्रायर पर चर्चा हुई. सभी का स्वागत
Read Moreपर्यावरण सप्ताह के तहत जिम्मी मगलिगन सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट द्वारा आयोजित सप्ताह भर के संवाद में चौथे दिन जैविक
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